Book Launch : हाइगा संग्रह ‘हाना’ का लोकार्पण: शब्द, रेखा और संवेदना का सुगंधित उत्सव

Bindash Bol

* जब हाइकु शब्दों से निकलकर चित्रों में खिल उठे—वही है हाना

* जापान से झारखंड तक फैली कविता की खुशबू

* हाइगा के माध्यम से भारतीय संवेदना का वैश्विक संवाद

* साहित्य का ऐसा संगम, जहाँ मौन भी बोलता है

Book Launch : लालपुर स्थित होटल रॉयलशन साहित्य, सौंदर्य और सृजनात्मकता का साक्षी बना, जब हाइगा संग्रह ‘हाना’ का भव्य लोकार्पण समारोह सम्मानित साहित्यकारों एवं साहित्यप्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम न केवल एक पुस्तक विमोचन था, बल्कि शब्दों, रेखाओं और भावनाओं का एक जीवंत उत्सव था।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, माँ शारदा के चित्र पर माल्यार्पण तथा डॉ. वीणा श्रीवास्तव की भावपूर्ण सरस्वती वंदना से हुआ। स्वस्ति पाठ डॉ. वैद्यनाथ मिश्र ने किया, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया। इसके पश्चात शॉल एवं पौधा भेंट कर निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव एवं हिमकर श्याम द्वारा कंचन अपराजिता को सम्मानित किया गया। मंच संचालन एवं अतिथियों का स्वागत ममता मनीष सिन्हा ने कुशलता से किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सत्या शर्मा कीर्ति ने प्रस्तुत किया।

‘हाना’ का लोकार्पण वरिष्ठ साहित्यकार निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव, प्रसिद्ध ग़ज़लकार हिमकर श्याम, लेखिका डॉ. वीणा श्रीवास्तव, लघुकथाकार सारिका भूषण, कवयित्री सत्या शर्मा कीर्ति, कवि चन्द्रिका ठाकुर देशदीप, अंजेश कुमार, डॉ. वैद्यनाथ मिश्र एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आसित कुमार द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। यह क्षण साहित्यिक एकता और सृजनात्मक सहयोग का प्रतीक बना।

अपने संबोधन में निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव ने पुस्तक के शीर्षक ‘हाना’, हाइकु की परंपरा, हाइगा एवं हाइफो जैसी विधाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला और कंचन अपराजिता को उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि ‘हाना’ केवल एक संग्रह नहीं, बल्कि संवेदनाओं की सजीव अभिव्यक्ति है।

लेखिका कंचन अपराजिता, जो वर्तमान में जापान के टोक्यो में निवासरत हैं, ने अपने वक्तव्य में पुस्तक की रचना-प्रक्रिया और उद्देश्य को साझा किया तथा सभी अतिथियों और पाठकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। बेंगलुरु की ऋता शेखर मधु इस संग्रह की सह-लेखिका हैं। प्रियांशु डोकानिया के सशक्त रेखांकनों पर आधारित हाइकु रचनाएँ इस संग्रह को विशिष्ट बनाती हैं।
पुस्तक का प्रकाशन दिल्ली के श्वेतांशु प्रकाशन द्वारा किया गया है।
कार्यक्रम में संग्रह के चुनिंदा हाइकु का पाठ सारिका भूषण, वीणा श्रीवास्तव, रश्मि शर्मा, हिमकर श्याम, डॉ. वैद्यनाथ मिश्र, अंजेश कुमार, आसित कुमार, संगीता कुजारा टॉक, सुमिता सिन्हा एवं अविनाश कुमार ने किया, जिससे श्रोता भाव-विभोर हो उठे। हिमकर श्याम ने कहा—“हाना की खुशबू दूर तक फैले, यही कामना है।”
इस अवसर पर संजय कृष्ण, रविकर श्याम, मिनी सहाय, विशाल कुमार, शेफाली शर्मा, राजेश कुमार, नूतन कुमारी, संजय वर्मा सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

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