Chhath Puja 2025: छठ महापर्व की शुरुआत शनिवार को नहाय-खाय के साथ प्रारंभ हो गया है। चार दिवसीय छठ महापर्व 28 अक्तूबर तक चलेगा। छठ पर्व के पहले दिन यानी नहाय-खाय के दिन व्रत करने वाली महिलाएं पवित्र स्नान कर सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं और शुद्धता के साथ व्रत प्रारंभ करती हैं।
छठ महापर्व केवल एक त्योहार ही नहीं है, बल्कि आस्था, श्रद्धा और आत्मसंयम का प्रतीक है। यह पर्व दिवाली के छह दिन बाद मनाया जाता है और मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है।
छठ महापर्व में महिलाएं कठोर नियमों का पालन करते हुए 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं और सूर्य देव को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि व संतान की दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। अगर महिलाएं पहली बार छठ व्रत कर रहे हैं, तो यह जानना महत्वपूर्ण है कि यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक अनुशासित और पवित्र जीवनशैली का प्रतीक भी है।
छठ पूजा अनुष्ठान के लिए आवश्यक सामग्री
व्रती और परिवार के लिए नए कपड़े
दो बड़ी बांस की टोकरियां (डावरी) – प्रसाद रखने के लिए
सूर्य देव को अर्घ्य देने हेतु बांस या पीतल का बर्तन
अर्घ्य के लिए दूध और गंगाजल रखने वाला गिलास, लोटा और थाली
पानी से भरा नारियल
पांच पत्तेदार गन्ने के तने
चावल, गेहूं और गुड़
12 दीपक, अगरबत्ती, बत्तियां, कुमकुम और सिंदूर
केले का पत्ता (पूजन स्थल सजाने के लिए)
फलों में – केला, सेब, सिंघाड़ा, शकरकंद, सुथनी (रतालू), अदरक का पौधा
हल्दी की गांठें और सुपारी
शहद और मिठाइयां
गंगाजल और दूध (अर्घ्य व स्नान हेतु)
प्रसाद में बनाने के लिए ठेकवा, गुड़ और गेहूं के आटे की सामग्री
ऐसे में अगर आप पहली बार छठ का व्रत कर रही हैं तो ये जरूर जान लीजिए कि इस व्रत में किन चीजों का खास ख्याल रखा जाता है और किन चीजों से परहेज किया जाता है.
छठ के व्रत की तैयारी करते समय सारी सामग्री पहले से ही लाकर रखें ताकि बाद में कुछ छूट न जाए. किचेन और चूल्हे की अच्छे से सफाई करना भी जरूरी है. साथ ही, सूप भी पहले से ही रख लें और अगर न मिले तो कोई स्टील का बर्तन लेकर उसे अच्छे से साफ कर लें.
इस व्रत में कपड़ों को लेकर भी खास नियम होते हैं. इस दौरान व्रत रखने वाली महिला को कोई भी फॉल या पीको की हुई साड़ी नहीं पहननी होती है. उनके कपड़े में किसी भी सुईं-धागे का इतएमाल नहीं होना चाहिए.
छठ का प्रसाद बनाते वक्त बिना लहसुन-प्याज के खाना बनाना होता है. इस दौरान तला, भुना और तेज मसाले वाला खाना भी नहीं खाया जाता है. साथ ही, जो इंसान व्रत करता है, उसको ही प्रसाद भी तैयार करना होता है.
इसके अलावा खरना की शाम को गुड़ की खीर बनानी होती है. इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है. इसमें एक बूंद पानी भी नहीं पीना होता है.
छठ के व्रत के समय अपनी सेहत का भी खास ख्याल रखें. पहली बार व्रत करने पर आपको चक्कर और कमजोरी हो सकती है. ऐसे में काम न करे, ज्यादा आराम करें और कंडीशन खड़ा खराब होने पर डॉक्टर को दिखाएं.
प्रेगनेंट महिलाएं छठ का निर्जला व्रत नहीं रख सकती हैं लेकिन वह नहाय-खाय और खरना के दिन वाला सात्विक भोजन खा सकती हैं और हल्का व्रत रख सकती हैं.
साथ ही छठ के दौरान कुछ चुनिंदा फल चढ़ाना जरूरी होता है. ऐसे में इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि कौनसे फल चढ़ाए जाने हैं. छठ पूजा में केला, नारियल, सेब और खजूर जरूर चढ़ाए जाते हैं.
