ध्रुव गुप्त
(आईपीएस) पटना
Chitragupta Puja 2025 : हमारे पुराणकारों ने महान शक्तियों और दिव्य अस्त्र-शस्त्रों से लैस असंख्य देवी देवताओं की रचना की है। आश्चर्यजनक रूप से उनमें एक देवता ऐसे भी हैं जिनके हाथ में शस्त्र नहीं, कलम है। एकदम शांत स्वभाव के और अपने काम से काम रखने वाले। इस अलग से देवता का नाम है चित्रगुप्त। धर्मराज के सहायक के रूप में वे हम मनुष्यों के पाप-पुण्य, अच्छे बुरे का लेखाजोखा अपने बही- खातों में संभालकर रखते हैं। उनके द्वारा दिए डाटा के आधार पर ही धर्मराज यह तय करते हैं कि किस प्राणी को स्वर्ग भेजना हैं और किसके लिए नर्क का द्वार खोल देना है। इस देश के कलमजीवी कायस्थ जाति के लोग चित्रगुप्त को अपना आदिपुरुष और स्वयं को चित्रांश मानते हैं। आज के दिन कलम और दावात के प्रतीकों से उनकी पूजा होती है। वैसे प्राचीन काल से चली आ रही पूजा की यह रीत पुरानी हो चुकी है। पृथ्वी पर बढ़ रहे पाप और पृथ्वीवासियों के जटिल होते चरित्र को देखते हुए अबतक यमलोक डिजिटल हो चुका होगा और चित्रगुप्त महाराज ने भी कलम की जगह हाथ में कंप्यूटर थाम लिया होगा।
आज इस देवता के पूजा के दिन सुबह से मोबाइल स्क्रीन पर इनकी तस्वीर लगाकर हाथ जोड़े खड़ा हूं। हे प्रभु, मैं चित्रांश न सही, आपके जैसा एक गुप्त और थोड़ा बहुत कलमजीवी तो हूं। इसी कनेक्शन के नाते आपसे एक वरदान की आकांक्षा है। धन-दौलत मैं आपसे नहीं मांगूंगा। वह धन की देवी लक्ष्मी का अधिकार क्षेत्र है। विद्या बुद्धि देवी सरस्वती का विभाग। स्वर्ग या नरक पर निर्णय देना धर्मराज का काम। आप मुझपर बस इतनी कृपा करें कि अपने आकाशीय एकाउंट का पासवर्ड मुझे दे दें। आपके सामने हाजिर होने से पहले मैं वहां से अपने पाप और पुण्य दोनों ही डिलीट कर देना चाहता हूं। ऐसा इसलिए ताकि स्वर्ग या नर्क में कहीं मेरी जगह न बनें और धर्मराज अपने मुस्टंडे यमदूतों से उठवाकर एक बार फिर मुझे इसी खूबसूरत पृथ्वी पर पटक दें ।
