CP Radhakrishnan: NDA ने सीपी राधाकृष्णन को क्यों बनाया उपराष्ट्रपति उम्मीदवार ? मोदी ने खेला ये मास्टरस्ट्रोक

Bindash Bol

CP Radhakrishnan: महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को एनडीए ने रविवार को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है। बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सीपी राधाकृष्णन के नाम का ऐलान किया। सीपी राधाकृष्णन के नाम का ऐलान करने के बाद बीजेपी ने एक साथ कई निशाने साधे है। इसके साथ ही कांग्रेस को भी बैकफुट पर धकेल दिया है। राधाकृष्णन झारखंड के राज्यपाल भी रहे हैं, उन्होंने पांडिचेरी का अतिरिक्त प्रभार संभाला है। इसके अलावा वे कोयंबटूर से दो बार सांसद रहे हैं और भाजपा की तमिलनाडु इकाई के प्रमुख रहे हैं।

RSS को किया खुश

बीजेपी ने सीपी राधाकृष्णन के नाम का ऐलान करने के साथ ही आरएसएस को भी खुश कर दिया है। राधाकृष्णन 16 साल की उम्र से आरएसएस से जुड़े हुए हैं। वहीं वे 1974 में भारतीय जनसंघ की राज्य कार्यकारिणी समिति के सदस्य बने थे। बीजेपी ने उपराष्ट्रपति उम्मीदवार पर राधाकृष्णन के नाम का ऐलान कर एक तीर से कई निशाने साधे है।

तमिलनाडु में अगले साल है विधानसभा चुनाव

बता दें कि तमिलनाडु में अगले साल विधानसभा चुनाव होने है। विधानसभा चुनाव से पहले राधाकृष्णन के नाम का ऐलान कर मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है। इससे आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी को फायदा हो सकता है। इसके अलावा तमिलनाडु के क्षेत्रीय दलों कोे भी सीपी राधाकृष्णन का विरोध करना आसान नहीं होगा। दरअसल एमके स्टालिन तमिल कार्ड खेलते है, ऐसे में उनको भी सीपी राधाकृष्णन का विरोध करना आसान नहीं होगा।

पीएम मोदी की कार्यशाली से है परिचित

सीपी राधाकृष्णन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी थे और कहा जाता है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली से भी परिचित हैं। 2004 में राधाकृष्णन ने संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया। वे ताइवान गए पहले संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी थे।

बीजेपी ने खेला साउथ कार्ड

उपराष्ट्रपति के लिए सीपी राधाकृष्णन के नाम का ऐलान करने के साथ ही बीजेपी ने साउथ कार्ड खेला है। दरअसल, इंडिया गठबंधन का उपराष्ट्रपति के लिए प्रत्याशी बिहार या आंध्र प्रदेश से होने की खबरे सामने आई थी। अब बीजेपी ने इंडिया गठबंधन को बैकफुट पर धकेल दिया है। हालांकि अब देखते है कि क्या इंडिया गठबंधन अब उपराष्ट्रपति पद के लिए अपना प्रत्याशी का ऐलान करेगी या नहीं।

तमिलनाडु से गहरा नाता

चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन का जन्म 4 मई 1957 को तमिलनाडु के तिरुपुर में हुआ था। 16 साल की उम्र से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े राधाकृष्णन ने 1974 में भारतीय जनसंघ के राज्य कार्यकारिणी सदस्य के रूप में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता और संगठनात्मक कौशल ने उन्हें भाजपा में एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया। तमिलनाडु के प्रभावशाली गाउंडर समुदाय से ताल्लुक रखने वाले राधाकृष्णन को ‘मोदी ऑफ तमिलनाडु’ भी कहा जाता है।

कोयंबटूर से सांसद के रूप में उभरे

राधाकृष्णन ने 1998 और 1999 में कोयंबटूर लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की। 1998 में कोयंबटूर बम धमाकों के बाद उन्होंने 1.5 लाख वोटों के अंतर से और 1999 में 55,000 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। सांसद के रूप में उन्होंने टेक्सटाइल्स पर संसदीय समिति के अध्यक्ष और वित्त समिति के सदस्य के रूप में काम किया। 2004 में वे संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे और ताइवान के पहले संसदीय दौरे में शामिल हुए।

तमिलनाडु और केरल में संगठनात्मक नेतृत्व

2004 से 2007 तक तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे राधाकृष्णन ने 19,000 किमी की 93-दिवसीय ‘रथ यात्रा’ आयोजित की, जिसमें नदियों को जोड़ने, आतंकवाद उन्मूलन, और अस्पृश्यता खत्म करने जैसे मुद्दों को उठाया गया। 2004 में DMK के NDA से अलग होने के बाद उन्होंने AIADMK के साथ गठबंधन को मजबूत किया। 2020-2022 तक वे केरल भाजपा के प्रभारी रहे और 2016-2020 तक कॉयर बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में 2,532 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड निर्यात का नेतृत्व किया।

राज्यपाल के रूप में योगदान

2023 में राधाकृष्णन को झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने सभी 24 जिलों का दौरा कर जनता और अधिकारियों से संवाद किया। 2024 में उन्हें तेलंगाना और पुडुचेरी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया, और जुलाई 2024 में वे महाराष्ट्र के राज्यपाल बने। उनकी सादगी और आदिवासी समुदायों के लिए काम ने उन्हें सम्मान दिलाया।

Share This Article
Leave a Comment