Dog : डॉग बाइट का क्लाईमेट कनेक्शन ??

Bindash Bol

कबीर संजय

Dog : इस मंच पर लिखते समय हमेशा कोशिश रहती है कि बात पर्सनालाइज नहीं हो। वह केवल मेरे तक, मेरे अनुभव तक सिमट कर न रह जाए। लेकिन, कुत्ता काटने पर लिखी गई पिछली पोस्ट लगता है कि कुछ ज्यादा ही पर्सनालाइज हो गई। कई सारे लोगों ने पोस्ट पर पार्थ को लेकर कंसर्न जाहिर किया। इस फिक्र के लिए आप सब दोस्तों का शुक्रिया। आभार।
कुछ सवाल हैं, जिन पर सचमुच विचार किए जाने की जरूरत है। चाहे आप डॉग लवर हों या डॉग हेटर्स। अगर मुझे अपने आप के बारे में कहना हो तो मैं खुद को डॉग हेटर्स की श्रेणी में नहीं रखता। बल्कि, डॉग लवर कहा जाना मुझे ज्यादा पसंद रहेगा और सचमुच मुझे कुत्तों से प्यार है। जिस तरह से वे अपना प्यार प्रगट करते हैं, आपके सुख और दुख के साथी बन जाते हैं, ऐसा किन्हीं दो प्रजातियों के बीच दुर्लभ ही दिखाई देता है। इसके बावजूद कुछ सवालों पर गहराई से विचार करने की जरूरत है।
क्या सचमुच कुत्तों के अंदर आक्रामकता बढ़ रही है। क्या अब वे इंसानों के ऊपर आक्रमण करने से हिचक नहीं रहे हैं। उनके अंदर बढ़ती आक्रामकता की आखिर वजह क्या है। क्या वे इंसानों द्वारा उनके साथ किए जाने वाले सलूक का बदला ले रहे हैं। आक्रामकता बढ़ने की बात तथ्यात्मक है या फिर यह डॉग हेटर्स द्वारा फैलाया गया झूठ है। कुत्तों की आक्रामकता का क्या कोई क्लाईमेट कनेक्शन भी है।
इस बात से कोई इनकार नहीं कर रहा कि कुत्ते इनसानों के साथ सदियों से रहते आए हैं। इनसानों ने धीरे-धीरे उन्हें पालतू बनाया है। दो अलग-अलग प्रजातियों के बीच प्यार और लगाव का यह अनूठा बंधन है। लेकिन, इस बात से भी इनकार नहीं किया जाना चाहिए कि पालतू बनाए गए कुत्ते भेड़िया झुंडों के कमजोर सदस्यों से विकसित हुए हैं। एक प्रजाति के तौर पर देखा जाए तो वे भेड़िए ही हैं और अभी भी कुत्ते और भेड़िये के बीच क्रास ब्रीडिंग के उदाहरण गाहे-बगाहे मिलते रहे हैं। मूल रूप से भेड़ियों से विकसित होने वाली यह प्रजाति इंसानों के विकास क्रम में उसके साथ रही है और दुनिया की शायद ही कोई ऐसी सभ्यता हो जहां पर इंसानों के निशान के साथ-साथ कुत्तों के निशान भी नहीं मिले हों।
बल्कि यह भी कहा जा सकता है कि इंसान के विकास क्रम में कुत्तों की भी एक बड़ी भूमिका रही है। शिकार और पशुपालन में उसकी मदद को इस तौर पर देखा जा सकता है। लेकिन, हाल के कुछ सालों में कुत्तों के अंदर आक्रामकता बढ़ रही है। यह केवल हमारे देश की बात नहीं है। बल्कि, इसे अन्य जगहों पर भी दर्ज किया जा रहा है। इस संबंध में अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए अध्ययन के नतीजों पर गौर किया जाना चाहिए। वर्ष 2023 में प्रकाशित इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं की एक टीम ने वर्ष 2009 से 2018 के बीच अमेरिका के आठ शहरों में कुत्ते के काटने की 69 हजार 525 घटनाओं का अध्ययन किया। इस अध्ययन से पता चला कि बारिश के मौसम की तुलना में गर्मी के दिनों में कुत्ते के काटने की ज्यादा घटनाएं हुईं।
अध्ययन कहता है कि बढ़ते तापमान और प्रदूषण का साफ असर कुत्तों के व्यवहार पर पड़ता हुआ देखा जा सकता है। और कुत्तों के अंदर आने वाला यह बदलाव सभी नस्लों पर देखा जा रहा है। बढ़ते तापमान और डॉग बाइट के बीच सीधा संबंध है। अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि खासतौर पर ओजोन का प्रदूषण कुत्तों के अंदर आक्रामकता बढ़ा रहा है। बढ़ते तापमान की वजह से भी उनके अंदर चिड़चिड़ापन और आक्रामकता बढ़ रही है।
हालांकि, अभी भी इस विषय में बहुत ज्यादा शोध और अध्ययन करने की जरूरत है। खासतौर पर भारत जैसे देश में जहां पर सड़क पर रहने वाले कुत्तों की संख्या इतनी ज्यादा है और वे इतनी बड़ी संख्या में लोगों को काटते भी हैं और इसके चलते मरने वाले लोगों की संख्या इतनी ज्यादा है।
और अगर ऊपर उल्लिखित किए गए अध्ययन के नतीजे सही हैं तो यह खतरे की एक और घंटी है। समझा जा सकता है कि ग्लोबल वार्मिंग एक ऐसी परिघटना है जो हमारे जीवन के ज्यादातर पहलुओं के प्रभावित करने वाली है।

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