- जिस ‘गंगा जल बँटवारा संधि’ से बांग्लादेश को मिलता रहा 35000 क्यूसेक पानी, उसे देने पर अब भारत करेगा विचार
- 30 साल पहले हुए समझौते की मियाद पूरी, बांग्लादेश खौफ में
GANGA WATER SHARING : भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद अब भारत ने बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि की शर्तों पर पुनर्विचार का ऐलान कर दिया है।
वर्तमान व्यवस्था में फरक्का बैराज से दोनों देशों को बारी-बारी से हर दस दिनों पर 35,000 क्यूसेक पानी मिलता है। भारत अब इस व्यवस्था में बदलाव कर, अपनी बारी में और पूरे lean season में भी अर्थात जब गंगा में पानी का प्रवाह सबसे कम होता है, 30,000-35,000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी चाहता है, जिससे उसकी बढ़ती जरूरतें पूरी हो सकें।
1975 में बना “फरक्का बैराज” कोलकाता पोर्ट के लिए पानी सुनिश्चित करने के लिए था, लेकिन 1996 की संधि के बाद न केवल कोलकाता पोर्ट को पानी की कमी, स्लोप फेल्योर, सिल्टिंग (गाद) जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है बल्कि NTPC का 2100 मेगावाट क्षमता का फरक्का सुपर थर्मल #पावर प्लांट भी जल संकट से जूझ रहा है। अब भारत इस व्यवस्था को अपने हित में पुनर्संतुलित करना चाहता है।
बांग्लादेश के लिए यह बड़ा झटका है, क्योंकि गंगा ही उसकी जीवनरेखा है। नई संधि छोटी अवधि की, लचीली और भारत की प्राथमिकताओं के अनुरूप होगी।
गंगा जल संधि का नवीनीकरण अब केवल तकनीकी या पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि भारत की बदलती भू-राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बन चुकी है।
