Gold Strategy : स्वर्ण वापसी का स्वाभिमान: RBI की ऐतिहासिक गोल्ड स्ट्रैटेजी से मजबूत हुई भारत की आर्थिक संप्रभुता

Bindash Bol

* गोल्ड रिजर्व अब सिर्फ आंकड़ा नहीं, रणनीतिक शक्ति है

* सोना वापस, स्वाभिमान वापस

* तिजोरी में ताकत, अर्थव्यवस्था में आत्मविश्वास

* “RBI ने सिर्फ सोना नहीं, भरोसा घर लाया है।”

* “आर्थिक स्वतंत्रता की नई परिभाषा – स्वर्ण संप्रभुता।”

Gold Strategy : भारत की आर्थिक यात्रा में कुछ फैसले ऐसे होते हैं जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाते हैं। हाल के वर्षों में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा लिया गया स्वर्ण रणनीति का निर्णय ऐसा ही एक ऐतिहासिक कदम है। मार्च 2023 से सितंबर 2025 के बीच RBI ने बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) से लगभग 274 टन सोना सफलतापूर्वक भारत वापस मंगा लिया।
यह केवल भंडारण का बदलाव नहीं है, बल्कि यह भारत की आर्थिक नीति में परिपक्वता, आत्मनिर्भरता और वैश्विक भू-राजनीतिक समझ का संकेत है।

कितना सोना और कहाँ रखा गया?

वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही (अप्रैल–सितंबर 2025) में ही RBI ने 64 टन सोना घरेलू तिजोरियों में स्थानांतरित किया। सितंबर 2025 के अंत तक भारत के कुल 880.8 टन स्वर्ण भंडार में से 575.8 टन सोना अब भारत की धरती पर सुरक्षित है।
यानि लगभग 65–66% गोल्ड रिजर्व अब देश के भीतर है।
यह सोना मुख्य रूप से मुंबई (मिंट रोड) और नागपुर स्थित उच्च-सुरक्षा वॉल्ट्स में रखा गया है, जहाँ अत्याधुनिक सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था मौजूद है।

क्यों बदली गई स्वर्ण रणनीति?

1️⃣ भू-राजनीतिक जोखिम

बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स जैसे संस्थानों में सोना रखना परंपरागत रूप से सुरक्षित माना जाता था। लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा विदेशी संपत्तियों को फ्रीज किए जाने की घटनाओं ने संप्रभु संपत्तियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
जब दुनिया में आर्थिक प्रतिबंध एक हथियार बन सकते हैं, तब अपनी संपत्ति अपने नियंत्रण में रखना ही बुद्धिमानी है।

2️⃣ लागत में बचत

विदेशी वॉल्ट्स में सोना रखने पर भारी स्टोरेज शुल्क और बीमा खर्च देना पड़ता है। सोने को वापस लाने से इन खर्चों में उल्लेखनीय कमी आएगी।
यह दीर्घकालिक वित्तीय दक्षता का संकेत है।

3️⃣ भंडारण विविधीकरण

सभी अंडे एक ही टोकरी में नहीं रखने चाहिए। RBI ने रणनीतिक रूप से भंडारण स्थानों में विविधता लाकर जोखिम प्रबंधन को मजबूत किया है।

1991 से 2025: एक भावनात्मक आर्थिक यात्रा

1991 के आर्थिक संकट के दौरान भारत को अपना सोना गिरवी रखना पड़ा था। वह दौर आर्थिक मजबूरी का प्रतीक था।
आज 2025 में, भारत वही सोना अपने देश की तिजोरियों में वापस रख रहा है। यह बदलाव केवल आर्थिक मजबूती का संकेत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आत्मविश्वास की वापसी भी है।
यह कदम दिखाता है कि भारत अब वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में निर्भर राष्ट्र नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और रणनीतिक रूप से सक्षम अर्थव्यवस्था है।

आर्थिक दृष्टिकोण से महत्व

* गोल्ड रिजर्व किसी भी देश की मुद्रा की विश्वसनीयता को मजबूत करता है।

* विदेशी मुद्रा भंडार के साथ संतुलन बनाकर यह वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करता है।

* संकट के समय गोल्ड एक सुरक्षित संपत्ति (Safe Haven Asset) के रूप में काम करता है।

जब वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ती है, तब सोना केंद्रीय बैंकों के लिए सुरक्षा कवच बन जाता है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

* स्वर्ण भंडार की वापसी “आत्मनिर्भर भारत” की आर्थिक परिकल्पना को और मजबूत करती है।

* यह निर्णय दर्शाता है कि भारत अब अपनी रणनीतिक संपत्तियों पर पूर्ण नियंत्रण चाहता है।

* यह संदेश भी स्पष्ट है—भारत अपनी आर्थिक संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा।

रणनीतिक संकेत क्या हैं?

* भारत वैश्विक वित्तीय जोखिमों को गंभीरता से ले रहा है।

* विदेशी प्रतिबंधों या संभावित राजनीतिक दबावों से बचाव की तैयारी है।

* मजबूत घरेलू भंडारण क्षमता विकसित की जा चुकी है।

* भारत का आर्थिक आत्मविश्वास चरम पर है।

व्यापक प्रभाव

यह कदम निवेशकों, वैश्विक एजेंसियों और विदेशी सरकारों को एक स्पष्ट संदेश देता है कि भारत दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रहा है।

साथ ही यह घरेलू स्तर पर भी विश्वास को मजबूत करता है कि देश की वित्तीय सुरक्षा मजबूत हाथों में है।

अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में यह ट्रेंड भी दिखता है कि कई देश अपने गोल्ड रिजर्व को वापस घरेलू तिजोरियों में ला रहे हैं। भारत का कदम उसी वैश्विक रणनीतिक सोच का हिस्सा है।

RBI द्वारा 274 टन सोना वापस लाने का निर्णय केवल एक लॉजिस्टिक बदलाव नहीं है। यह आर्थिक परिपक्वता, रणनीतिक दूरदर्शिता और राष्ट्रीय आत्मविश्वास का प्रतीक है।
यह कदम दर्शाता है कि भारत अब केवल वैश्विक आर्थिक व्यवस्था का हिस्सा नहीं है, बल्कि उसमें सक्रिय और रणनीतिक भूमिका निभा रहा है।
आज जब दुनिया अनिश्चितताओं से भरी है, भारत ने अपने सबसे मूल्यवान भंडार को अपने घर में सुरक्षित रखकर यह साबित कर दिया है—
आर्थिक संप्रभुता ही असली शक्ति है।

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