Good News: अमेरिका में कार्यरत अन्य देशों के पेशेवरों के लिए एक अच्छी खबर है। वे अब अपने एच-1बी वीजा को अमेरिका छोड़े बिना रिन्यू कर सकेंगे। इससे लाखों भारतीय पेशेवरों को लाभ होगा, जो विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। एक साल पहले अमेरिकी विदेश विभाग ने इस प्रक्रिया का परीक्षण करने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था, जिसमें लगभग 20,000 योग्य प्रतिभागियों को शामिल किया गया था। यूएस सरकार के इस फैसले का सबसे अधिक असर भारतीयों पर पड़ेगा। यह इसलिए क्योंकि अमेरिका में एच-1बी वीजा वालों की संख्या में भारतीयों की तादाद 72 प्रतिशत के आसपास है। यूएस में टेक्नोलॉजी, मेडिकल और रिसर्च जैसे स्पेशल सेक्टर्स में हजारों की संख्या में भारतीय कार्यरत हैं। प्रेसिडेंट इलेक्ट डोनाल्ड ट्रंप के शपथ के पहले ही अमेरिकी विदेश विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट सफल होने की बात कहते हुए यह संभावना जतायी है कि इस साल 2025 में नए नियम लागू हो जाएंगे। हालांकि, अभी तारीख सामने नहीं आ सकी है।
साल भर पहले अमेरिका ने लांच किया था पायलट प्रोजेक्ट
अमेरिकी विदेश विभाग ने करीब एक साल पहले एच-1बी वीजा के रिन्यूवल के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट को शुरू किया था। इस पायलट प्रोजेक्ट में लगभग 20,000 प्रोफेशनल्स ने हिस्सा लिया था। इसके तहत इन लोगों का एच-1बी वीजा एक्सपायर होने के पहले ही उसका रिन्यूवल कर दिया गया था। अमेरिका में यह प्रोजेक्ट सफल माना गया। प्रोफेशनल्स को वीजा रिन्यूवल के लिए अपने देश वापस लौटना नहीं पड़ा था।
अब अमेरिका ने पायलट प्रोजेक्ट को लागू करने का बनाया मन
दरअसल, एच-1बी वीजा के रिन्यूवल के लिए प्रोफेशनल्स को अपने देश वापस लौटना पड़ता था और फिर उनको आवेदन करना होता था। लेकिन पायलट प्रोजेक्ट सफल होने के बाद अब उनको रिन्यूवल के लिए देश नहीं लौटना पड़ेगा। एच-1बी वीजा वाले लंबे समय से इस समस्या को उठा रहे थे। रिन्यूवल नियमों के तहत देश वापस लौटने के लिए आवेदकों को लाखों रुपये खर्च केवल फ्लाइट टिकट के लिए करना पड़ता था। इसके अलावा अन्य खर्च भी होता था। इसके अलावा वीजा अप्वाइंटमेंट में देरी और अन्य प्रॉसेस भी काफी परेशान करने वाला होता था। हालांकि, पायलट प्रोजेक्ट सफल होने के बाद अब इस साल 2025 में इसे लागू करने की प्रक्रिया अपनायी जा सकती है। इससे रिन्यूवल प्रॉसेस में तेजी आएगी।
