Grishneshwar Jyotirlinga : महाराष्ट्र के ओरंगाबाद जिले के दोलताबाद से करीब 12 किमी दूर स्थित है बारहवां ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर। ओरंगाबाद से करीब 110 किमी दूर अजंता की गुफाएं और करीब 30 किमी दूर एलोरा की गुफाएं। घृष्णेश्वर जाने वाले अधिकतर लोग इन गुफाओं की सैर भी जरूर करते हैं। शिव पुराण के मुताबिक, घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से ही शिव भक्त पापों से मुक्त हो जाता है।
घृष्णेश्वर मंदिर की शयन आरती का महत्व काफी अधिक है। मंदिर में 101 शिवलिंग बनाकर पूजा की जाती है, यहां आने वाले भक्त 101 परिक्रमाएं भी करते हैं। मंदिर के पास ही एक सरोवर भी है। भक्त घृष्णेश्वर के साथ ही इस सरोवर के दर्शन करने भी आते हैं। यहां एक लक्ष्य विनायक नाम का प्राचीन गणेश मंदिर भी है। ये मंदिर 21 गणेश पीठों में से एक माना जाता है।
घृष्णेश्वर मंदिर की प्राचीन इमारत मुगल और मराठा राजाओं की लड़ाई में कई बार नष्ट हुई थी और कई बार इसे फिर से बनाया गया। इंदौर की रानी अहल्याबाई ने 18वीं शताब्दी में वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया था। मंदिर में दक्षिण भारतीय मंदिरों की जैसी वास्तुकला शैली दिखाई देती है।
ये है घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा
पौराणिक कथा के मुताबिक पुराने समय में इस क्षेत्र में एक ब्राह्मण सुधर्मा और उसकी पत्नी सुदेहा रहा करते थे। इनकी कोई संतान नहीं थी। इसलिए सुदेहा ने अपनी छोटी बहन घुश्मा का विवाह अपने पति सुधर्मा से करवा दिया।
सुदेहा की बहन घुश्मा शिव जी की परम भक्त थी। वह हमेशा शिव जी की पूजा में लगी रहती थी। उसके मन में किसी के लिए कोई ईर्ष्या, लालच, क्रोध जैसी बुराइयां नहीं थीं। विवाह के बाद घुश्मा और सुदेहा के यहां पुत्र संतान का जन्म हुआ।
अपनी बहन घुश्मा के यहां पुत्र होने से सुदेहा को ईर्ष्या होने लगी। सुदेहा के मन में जलन की भावना इतनी बढ़ गई कि एक दिन उसने अपनी ही बहन के बेटे की हत्या कर दी। हत्या के बाद बालक का शव एक कुंड में डाल दिया।
जब ये बात घुश्मा को मालूम हुई तो वह बिल्कुल ही डरी नहीं, निराश नहीं हुई। उसने शांति बनाए रखी और शिव जी की पूजा करनी शुरू कर दी। भक्त घुश्मा की भक्ति से शिव जी प्रसन्न हो गए। शिव जी घुश्मा के सामने प्रकट हुए। भगवान ने घुश्मा के पुत्र को जीवन दान दे दिया। घुश्मा का पुत्र लौट आया।
घुश्मा ने शिव जी से प्रार्थना की थी कि अब से वे यहीं विराजमान रहें, ताकि यहां भक्तों को आपके दर्शन का लाभ मिल सके। भक्त की इच्छा पूरी करने के लिए शिव जी यहां ज्योति रूप में विराजित हो गए। घुश्मा के नाम से ही इस ज्योतिर्लिंग का नाम घुश्मेश्वर पड़ा है।
ऐसे पहुंच सकते हैं घुश्मेश्वर
इस मंदिर तक आने के लिए पहले औरंगाबाद आ सकते हैं। औरंगाबाद में एयरपोर्ट भी है। औरंगाबाद रेल और सड़क मार्ग से देश के सभी बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। औरंगाबाद पहुंचकर यहां से बस या टैक्सी की मदद से घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग पहुंच सकते हैं।
