Hemant Soren : माँ कामाख्या के दरबार से चुनावी रण तक.. असम में हेमंत सोरेन का राजनीतिक-आध्यात्मिक अभियान

Sushmita Mukherjee

Hemant Soren : असम विधानसभा चुनाव 2026 के निर्णायक चरण से ठीक पहले झारखंड के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने चुनावी व्यस्तताओं के बीच आस्था और राजनीति के अनोखे संगम का संदेश दिया। उन्होंने गुवाहाटी स्थित नीलाचल पर्वत पर विराजमान शक्तिपीठ कामाख्या मंदिर में पूजा-अर्चना कर चुनावी अभियान का आध्यात्मिक समापन किया।
माँ कामाख्या के चरणों में उन्होंने मंत्रोच्चारण करते हुए प्रदेश और देशवासियों के सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की। साथ ही असम की धरती पर शोषित, वंचित और आदिवासी समाज को न्याय दिलाने के संकल्प को दोहराया।

चुनावी अभियान का जोरदार प्रदर्शन

असम विधानसभा चुनाव (9 अप्रैल 2026) से ठीक पहले हेमंत सोरेन ने JMM की रणनीति को नई दिशा दी। झारखंड से बाहर पहली बार बड़े पैमाने पर विस्तार करते हुए JMM ने 21 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। फोकस मुख्य रूप से चाय बागान मजदूरों (टी ट्राइब्स) और आदिवासी समुदायों पर रहा, जिनकी संख्या असम में लगभग 60-70 लाख है।

* बिस्वनाथ में धुली टी एस्टेट ग्राउंड पर विशाल रैली (लगभग 13,000-15,000 लोग) को संबोधित किया, जहाँ उन्होंने JMM और जय भारत पार्टी के संयुक्त उम्मीदवार तिहारू गौर के समर्थन में अपील की।

* डिब्रूगढ़ (टिंगखोंग), मजबत, भेरगांव, रंगापाड़ा, गोसाईंगांव आदि क्षेत्रों में रैलियां कीं।

* पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में उन्होंने चाय बागान मजदूरों के बीच “अपनी माटी, अपनी पहचान” का संदेश दिया।

* पत्नी कल्पना मुर्मू सोरेन भी स्टार प्रचारक के रूप में सक्रिय रहीं और टी ट्राइबल महिलाओं, शिक्षा तथा रोजगार के मुद्दों को उठाया।

हेमंत सोरेन ने बार-बार कहा…
“चाय बागान मजदूरों के पूर्वजों ने अपने पसीने से असम को समृद्ध बनाया, लेकिन आज भी वे न्याय और सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने बहुत लंबा इंतजार किया है।”

उन्होंने चाय मजदूरों को ST दर्जा, उचित मजदूरी, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा और रोजगार की मांग को प्रमुख मुद्दा बनाया।

तीर-धनुष का संकल्प: आदिवासी एकता की नई लहर

JMM का तीर-धनुष प्रतीक असम के आदिवासी और टी ट्राइब समुदायों (संथाल, मुंडा, उरांव, कुरुख आदि) के लिए भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है। हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि शोषित-वंचितों की हक की जंग है।
असम की क्रांतिकारी भूमि (मणिराम देवान, कनकलता बरुआ, कुशल कोनवार जैसी वीर परंपरा) पर JMM कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। पार्टी का लक्ष्य है…

* चाय बागान क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति

* आदिवासी स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा

* विकास की मुख्यधारा में इन समुदायों को शामिल करना

चुनावी अभियान: आंकड़ों के साथ JMM का सशक्त विस्तार

असम विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल 2026 को एक चरण में होने हैं। कुल 126 सीटों वाली विधानसभा में मतगणना 4 मई 2026 को होगी। कुल 722 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, जिसमें भाजपा के 90, कांग्रेस के 99 और स्वतंत्र उम्मीदवार सबसे अधिक (258) हैं।

JMM ने कांग्रेस के साथ सीट-शेयरिंग वार्ता विफल होने के बाद स्वतंत्र रूप से 21 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। पार्टी का मुख्य फोकस चाय बागान मजदूर (टी ट्राइब्स/आदिवासी) समुदाय पर रहा है, जिनकी आबादी असम में अनुमानित 60-70 लाख (लगभग 20% मतदाता) है। ये समुदाय (संथाल, मुंडा, उरांव, कुरुख आदि) मुख्य रूप से ऊपरी असम के चाय बेल्ट में केंद्रित हैं और लगभग 35 सीटों पर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

आस्था और राजनीति का संगम

लगातार चुनावी दौरे के बाद माँ कामाख्या के दरबार पहुंचना हेमंत सोरेन की राजनीतिक शैली का प्रतीक माना जा रहा है — जहाँ जनसंघर्ष और आध्यात्मिक विश्वास साथ-साथ चलते हैं।
माँ कामाख्या से आशीर्वाद लेते हुए उन्होंने असम में शांति, न्यायपूर्ण विकास और आदिवासी समाज के सशक्त भविष्य की कामना की।
इसी के साथ JMM ने स्पष्ट संकेत दिया है कि उसकी राजनीति अब झारखंड की सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी आवाज बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

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