* असम विधानसभा चुनाव 2026: हेमंत सोरेन का मिशन असम — आदिवासी राजनीति का नया अध्याय
* राजनीतिक विस्तार, आदिवासी एकता और राष्ट्रीय पहचान की ओर JMM की ऐतिहासिक कोशिश
Hemant Soren : पूर्वोत्तर के प्रवेश द्वार असम में 2026 का विधानसभा चुनाव महज सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि एक नई राजनीतिक चेतना का उदय भी है। झारखंड की सीमाओं को लांघकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने असम की ‘चाय बेल्ट’ में अपनी ताकत झोंक दी है। ‘तीर-धनुष’ का संकल्प अब असम के चाय बागानों में ‘अबुआ दिशुम, अबुआ राज’ के नारे के साथ गूँज रहा है।
वाकई में असम विधानसभा चुनाव 2026 केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि भारत की बदलती क्षेत्रीय राजनीति का बड़ा संकेत बनता दिख रहा है। झारखंड के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने पहली बार असम की धरती पर व्यापक चुनावी अभियान चलाकर अपनी पार्टी को झारखंड की सीमाओं से बाहर राष्ट्रीय आदिवासी राजनीति के केंद्र में स्थापित करने की कोशिश की है।
1. रणनीतिक विस्तार: JMM का ‘मिशन असम’
झारखंड में आदिवासी राजनीति की धुरी रही JMM अब राष्ट्रीय पहचान की ओर अग्रसर है। कांग्रेस के साथ गठबंधन की वार्ता विफल होने के बाद, हेमंत सोरेन ने अकेले दम पर चुनावी समर में उतरने का साहसिक निर्णय लिया।
* चुनावी भागीदारी: JMM ने 21 रणनीतिक सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं।
* गठबंधन: स्थानीय स्तर पर ‘जय भारत पार्टी’ के साथ तालमेल कर क्षेत्रीय समीकरणों को साधा गया है।
* प्रमुख चेहरा: हेमंत सोरेन के साथ उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने भी स्टार प्रचारक के रूप में मोर्चा संभाला, जिससे महिला मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत हुई है।
‘टी-ट्राइब्स’: 35 सीटों का किंगमेकर समुदाय
JMM का पूरा ध्यान असम के उस 60-70 लाख आदिवासी समुदाय (टी-ट्राइब्स) पर है, जो मूल रूप से झारखंड और ओडिशा से जाकर वहां बसे हैं। इनमें संथाल, मुंडा, उरांव और कुरुख प्रमुख हैं।
* वोटर बेस: असम की लगभग 20% आबादी और 35 लाख निर्णायक मतदाता।
* प्रभाव क्षेत्र: बिस्वनाथ, डिब्रूगढ़, मजबत, गोसाईंगांव और सोनारी जैसे चाय बागान क्षेत्र।
मुख्य एजेंडा और मांगें…
1. ST दर्जा: झारखंड में जो समुदाय ST हैं, उन्हें असम में भी जनजाति का दर्जा दिलाना (वर्तमान में वे OBC श्रेणी में हैं)।
2. आर्थिक न्याय: न्यूनतम मजदूरी ₹500 प्रतिदिन सुनिश्चित करना।
3. अधिकार: भूमि का पट्टा, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं।
चुनावी गणित: 2021 से 2026 तक बदलता समीकरण
2021 असम विधानसभा परिणाम
* कुल सीटें: 126
* NDA (BJP+AGP+UPPL): 75 सीटें
* महाजोत (कांग्रेस गठबंधन): 50 सीटें
* BJP वोट शेयर: 33.21%
* कांग्रेस वोट शेयर: 29.67%
टी ट्राइब्स वोट बैंक उस समय NDA की सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ, खासकर ऊपरी असम में।
2026 का चुनावी परिदृश्य
* मतदान: 9 अप्रैल 2026
* परिणाम: 4 मई 2026
* JMM: 21 सीटों पर सीधा मुकाबला
* 35–40 सीटों पर टी ट्राइब्स निर्णायक
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि JMM 10–15% वोट भी हासिल कर लेती है, तो चाय बेल्ट की कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला बन सकता है।
JMM की रणनीति: जीत से ज्यादा आधार निर्माण
JMM का लक्ष्य केवल तत्काल सत्ता नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राजनीतिक विस्तार है।
संभावित चुनावी परिणाम (विश्लेषण)
* संभावित सीटें: 2–5
* संभावित वोट शेयर: 4–8% (चाय बेल्ट में 15–20% तक)
* प्रभाव: असम में स्थायी संगठनात्मक आधार
यह वही रणनीति है जो कई क्षेत्रीय दल राष्ट्रीय पहचान बनाने के लिए अपनाते रहे हैं — पहले सामाजिक आधार, फिर राजनीतिक शक्ति।
JMM के लिए क्या दांव पर है?
* संभावित सफलता: यदि पार्टी 4-8% वोट शेयर और 3-5 सीटें जीतने में सफल रहती है, तो यह झारखंड के बाहर उसका पहला बड़ा वैधानिक विस्तार होगा।
* राष्ट्रीय कद: यह जीत हेमंत सोरेन को देश के सबसे बड़े आदिवासी नेता के रूप में स्थापित करेगी।
राजनीतिक जोखिम: विशेषज्ञों का मानना है कि JMM की मौजूदगी से विपक्षी वोटों का बिखराव हो सकता है, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है। हालांकि, JMM का लक्ष्य अल्पकालिक लाभ के बजाय असम में एक स्थायी राजनीतिक आधार तैयार करना है।
नई पहचान की ओर JMM
2011 में JMM का असम में वोट शेयर 1% से भी कम था। 2026 में 21 सीटों पर केंद्रित रणनीति दिखाती है कि पार्टी अब खुद को राष्ट्रीय आदिवासी राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करना चाहती है।
हेमंत सोरेन की जनसभाएं, माँ कामाख्या के दरबार में आस्था प्रदर्शन और तीर-धनुष के प्रतीक के साथ अभियान ने राजनीतिक संदेश स्पष्ट किया है.. आदिवासी स्वाभिमान अब क्षेत्रीय नहीं, राष्ट्रीय मुद्दा बनेगा।
नई जमीन, नया संकल्प
हेमंत सोरेन का असम अभियान केवल सीटों की गणित नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता का विस्तार है। माँ कामाख्या का आशीर्वाद और चाय बागानों में उमड़ती भीड़ इस बात का संकेत है कि ‘तीर-धनुष’ ने असम की राजनीति में अपनी जगह बना ली है। 4 मई के परिणाम यह तय करेंगे कि क्या JMM असम की विधानसभा में आदिवासियों की नई और प्रखर आवाज बनकर उभरेगा।
असम चुनाव से आगे की राजनीति
असम विधानसभा चुनाव 2026 में JMM का प्रदर्शन चाहे सीटों में सीमित क्यों न रहे, लेकिन इसका राजनीतिक असर दूरगामी हो सकता है।
यदि चाय बागान समुदाय में पार्टी भरोसा बनाने में सफल रही, तो यह झारखंड से बाहर JMM की पहली स्थायी राजनीतिक जड़ साबित होगी.. और भारतीय राजनीति में आदिवासी विमर्श को नई दिशा दे सकती है।
