How India Gives2025 : क्या भारत में लोग सचमुच दिल खोलकर दान करते हैं? ‘How India Gives 2025’ रिपोर्ट इस सवाल का दिलचस्प जवाब देती है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल करीब 54 हजार करोड़ रुपये का व्यक्तिगत दान दिया जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि करीब 68-69% लोग किसी न किसी रूप में मदद करते हैं। यानी हर तीन में से दो भारतीय दान या सेवा से जुड़े हैं।
54 हजार करोड़ का दान आखिर कहां जाता है?
रिपोर्ट बताती है कि 45.9% दान धार्मिक संस्थाओं को जाता है। इसके बाद करीब 41.8% दान सीधे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचता है। वहीं गैर-धार्मिक संगठनों (NGO) को सिर्फ 14.9% हिस्सा मिलता है। यह आंकड़े बताते हैं कि भारत में दान की परंपरा अभी भी धार्मिक और सामुदायिक भावनाओं से गहराई से जुड़ी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार कुल घरेलू दान का अनुमान करीब 98 हजार करोड़ रुपये सालाना है। यानी आम घर-परिवार ही भारत की दान संस्कृति की असली ताकत हैं।
क्या सच में 68% भारतीय किसी न किसी रूप में दान करते हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, करीब 68-69% भारतीय किसी न किसी तरीके से मदद करते हैं। यानी हर 10 में से लगभग 7 लोग दान देते हैं। यह दान केवल पैसे तक सीमित नहीं है। भारत में दान का सबसे बड़ा आधार आम घर हैं। अनुमान है कि घरेलू स्तर पर हर साल करीब 98 हजार करोड़ रुपये का दान किया जाता है। वहीं संगठित तरीके से लगभग 54 हजार करोड़ रुपये का दान दर्ज होता है। यह दिखाता है कि भारत में रोजमर्रा की जिंदगी में भी लोग मदद करने की आदत रखते हैं।
सबसे ज्यादा दान किसे मिलता है-धार्मिक संस्थाएं या NGO?
रिपोर्ट का सबसे दिलचस्प हिस्सा यही है।
* 45.9% दान धार्मिक संस्थाओं को जाता है
* 41.8% दान सीधे जरूरतमंद लोगों को दिया जाता है
* केवल 14.9% दान गैर-धार्मिक संगठनों (NGO) तक पहुंचता है
यानी भारत में लोग पहले धर्म से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देते हैं। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे या धार्मिक ट्रस्ट दान के सबसे बड़े लाभार्थी हैं।
दान किस रूप में ज्यादा होता है-पैसा, सामान या समय?
* रिपोर्ट बताती है कि भारत में दान केवल नकद नहीं होता।
* 46-48% लोग खाना, कपड़े और अन्य सामान देते हैं
* 44% लोग नकद दान करते हैं
* करीब 30% लोग समय देकर सेवा (Volunteering) करते हैं
मुफ्त सामुदायिक रसोई, लंगर, भोजन वितरण जैसे कामों में बड़ी मात्रा में भोजन दान किया जाता है। धार्मिक संस्थानों में सेवा करना भी सबसे आम रूप है।
क्या केवल अमीर लोग ही दान करते हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, जिन घरों की मासिक आय 4,000–5,000 रुपये है, उनमें भी करीब आधे लोग दान करते हैं। जैसे-जैसे आय बढ़ती है, दान में भागीदारी 70–80% तक पहुंच जाती है। उच्च आय वर्ग में लगभग 80% लोग नियमित दान करते हैं। यानी दान केवल अमीरों की आदत नहीं है-यह हर वर्ग में मौजूद है।
दान की सबसे बड़ी वजह क्या है?
करीब 90% लोग दान को धार्मिक कर्तव्य या नैतिक जिम्मेदारी मानते हैं। आमने-सामने की अपील सबसे ज्यादा असरदार मानी गई है। इससे पता चलता है कि भारत में दान की भावना सिर्फ सामाजिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और भावनात्मक भी है।
दानदाताओं के चार प्रकार कौन हैं?
रिपोर्ट में दानदाताओं को चार श्रेणियों में बांटा गया है:
* ग्रासरूट दाता
* एस्पिरेशनल दाता
* प्रैक्टिकल दाता
* वेल-ऑफ गिवर्स
हर समूह की प्रेरणा, जागरूकता और जुड़ने का तरीका अलग है।
क्या बदल रही है भारत की फिलैंथ्रॉपी?
‘How India Gives 2025’ रिपोर्ट बताती है कि भारत में दान की परंपरा मजबूत है और विकास के साथ इसका स्वरूप भी बदल रहा है। राष्ट्रीय खपत आंकड़ों के आधार पर किया गया यह अध्ययन दिखाता है कि भारतीय समाज उदार है, लेकिन दान का बड़ा हिस्सा अभी भी धार्मिक संस्थाओं की ओर जाता है।
