IndiaAlert : मिजोरम में एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू और छह यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। ये सभी बिना अनुमति भारत-म्यांमार सीमा में अवैध गतिविधियों में संलिप्त थे। जानकारी के अनुसार, मैथ्यू कुछ ईसाई संगठनों से चंदा इकट्ठा कर रहा था, जिसका इस्तेमाल शायद विद्रोही समूहों को वित्तीय मदद देने के लिए हो रहा था। यह मामला तब उजागर हुआ जब इन सभी को संदिग्ध गतिविधियों के तहत पकड़ा गया। यह स्पष्ट है कि इनकी गतिविधियों में भारत के खिलाफ साजिश के तत्व शामिल हो सकते हैं। अमेरिकी नागरिक मैथ्यू विदेशों में कुछ ईसाई संगठनों और धार्मिक ग्रुप्स से चंदा इकट्ठा कर रहा था.
मिजोरम में बिना अनुमति प्रवेश और गैरकानूनी गतिविधियों के आरोप में यूक्रेन के 6 और अमेरिका के 1 नागरिक को गिरफ्तार किया गया था. इन सातों विदेशियों को लेकर हर रोज नए खुलासे हो रहे है. सूत्रों के मुताबिक, सातों आरोपी भारत को आतंकी गतिविधि के लिए एक बड़ा ट्रांजिट कॉरिडोर बनाने की तैयारी में थे. इतना ही नहीं वे ड्रोन और आधुनिक युद्ध तकनीक की ट्रेनिंग भी दे रहे थे.
जांच में पता चला है कि इन विदेशी नागरिकों का उद्देश्य भारत को आतंकवादी गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप में उपयोग करना था। जानकारी के मुताबिक, ये लोग ड्रोन और आधुनिक युद्ध तकनीक के प्रशिक्षण में भी शामिल थे। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस संभावना की जांच कर रही हैं कि आरोपी भारत विरोधी संगठनों से संपर्क में थे। यह संदिग्ध नेटवर्क सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन चुका है।
इस मामले की आगे की जांच के लिए एनआईए की दो टीम मिजोरम म्यांमार सीमा पर स्लीपर सेल मॉड्यूल के लोगों की तलाश में पहुंची है. इस संवेदनशील मामले की जांच कर रही केन्द्रीय संयुक्त जांच टीम को जानकारी मिली है कि इस मॉड्यूल के मिजोरम म्यांमार सीमा पर स्थानीय नागरिकों का बड़ा सपोर्ट मिला था. ये नागरिक भारत और म्यांमार दोनों देशों में हैं.
जांच एजेंसियों को शक है कि कुछ विदेशी भाड़े के लड़ाके यानी फ्रीलांसर म्यांमार के गृहयुद्ध में शामिल होने के लिए भारत का इस्तेमाल रास्ते के तौर पर कर रहे हैं.
सूत्रों के मुताबिक, 2024 में मिजोरम के अधिकारियों ने पहली बार अलर्ट किया था. एजेंसियों के पास कुछ वीडियो और फोटो भी आए हैं, जिनकी जांच चल रही है. इनमें म्यांमार के जंगलों में कुछ विदेशी हथियारबंद लोग नजर आ रहे हैं. उनकी भाषा और बोलचाल स्थानीय नहीं लगती, जिससे शक और बढ़ गया है कि ये बाहर से आए लड़ाके हैं. सूत्रों का कहना है कि इनकी गतिविधियां वैसी ही हैं जैसी दूसरे देशों में विदेशी लड़ाकों की होती रही हैं.
