India EU FTA : EU के साथ ‘Mother of All Deals’: भारत के लिए गेमचेंजर साबित होगा यह ऐतिहासिक FTA

Bindash Bol
  • 17 साल का इंतज़ार, आज हो सकता है खत्म
  • भारत-EU FTA: सिर्फ ट्रेड डील नहीं, स्ट्रैटेजिक मास्टरस्ट्रोक
  • कारों से लेकर कपड़ों तक, बदलेगा पूरा बाज़ार
  • चीन पर निर्भरता घटाने का सबसे बड़ा दांव
  • ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ क्यों कहा जा रहा है इस समझौते को?

India EU FTA : भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच आज एक ऐसा समझौता साइन होने जा रहा है, जिसे ग्लोबल ट्रेड की दुनिया में ‘Mother of All Deals’ कहा जा रहा है। करीब 17 साल पहले शुरू हुई भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की बातचीत अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। अगर यह डील आज साइन होती है, तो यह न सिर्फ भारत की व्यापार नीति को नई दिशा देगी, बल्कि वैश्विक आर्थिक समीकरणों में भी बड़ा बदलाव ला सकती है।

2007 से 2026 तक का लंबा सफर

भारत और EU के बीच FTA पर बातचीत साल 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन मार्केट एक्सेस, लेबर लॉ, पर्यावरण मानक, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स और टैरिफ कटौती जैसे मुद्दों पर मतभेदों के कारण यह प्रक्रिया बार-बार अटकती रही।
साल 2013 के बाद तो बातचीत लगभग ठप हो गई थी।
हालांकि, बदलते वैश्विक हालात—चीन पर अत्यधिक निर्भरता, सप्लाई चेन में रुकावट, रूस-यूक्रेन युद्ध और बढ़ते प्रोटेक्शनिज्म—ने दोनों पक्षों को फिर से एक टेबल पर ला खड़ा किया।
साल 2022 में बातचीत दोबारा शुरू हुई और पिछले एक साल में इसमें असाधारण तेजी देखने को मिली। अधिकारियों के मुताबिक, इस बार सबसे बड़ा फैक्टर है Political Will—नई दिल्ली और ब्रुसेल्स दोनों इस डील को रणनीतिक जरूरत मान रहे हैं।

कारों पर टैरिफ: सबसे बड़ा ब्रेकथ्रू

इस FTA का सबसे चर्चित और संवेदनशील मुद्दा है यूरोपीय कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती। फिलहाल भारत में पूरी तरह बनी कारों पर 70% से 110% तक टैक्स लगता है, जिससे BMW, Mercedes-Benz, Volkswagen जैसी लग्जरी कारें बेहद महंगी हो जाती हैं।
प्रस्ताव के अनुसार…
• 15,000 यूरो से ज्यादा कीमत वाली यूरोपीय कारों पर
•• इंपोर्ट ड्यूटी तुरंत 40% तक घटाई जा सकती है
•• जो आगे चलकर 10% तक लाई जा सकती है
•• शुरुआती चरण में सालाना लगभग 2 लाख पेट्रोल-डीजल कारें इस दायरे में आ सकती हैं।
हालांकि, घरेलू उद्योग को बचाने के लिए इलेक्ट्रिक कारों को पहले 5 साल तक इस छूट से बाहर रखा जाएगा।
यह कदम भारतीय ऑटो सेक्टर के लिए चुनौतीपूर्ण जरूर होगा, लेकिन इससे टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, कंपटीशन और कंज्यूमर चॉइस बढ़ेगी।

भारत को इस डील से क्या चाहिए?

भारत इस FTA को सिर्फ इंपोर्ट डील नहीं, बल्कि एक्सपोर्ट बूस्टर के रूप में देख रहा है।
भारत चाहता है कि उसके लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स को यूरोपीय बाजार में बेहतर और सस्ती एंट्री मिले।

भारत के प्रमुख फोकस सेक्टर्स

  • टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स
  • लेदर और फुटवियर
  • जेम्स एंड ज्वैलरी
  • इंजीनियरिंग गुड्स
  • प्रोसेस्ड फूड

2023 में EU द्वारा GSP (Generalised System of Preferences) वापस लेने से भारतीय एक्सपोर्टर्स को बड़ा झटका लगा था। FTA के तहत टैरिफ घटने या खत्म होने से भारत को दुनिया के सबसे अमीर कंज्यूमर मार्केट में दोबारा मजबूती मिल सकती है।
इसके अलावा भारत चाहता है…

  • फार्मा और केमिकल सेक्टर के लिए आसान रेगुलेशन
  • IT और प्रोफेशनल सर्विसेज में ज्यादा मार्केट एक्सेस
  • स्किल्ड वर्कर्स की आसान मूवमेंट
  • डबल सोशल सिक्योरिटी पेमेंट से राहत खेती और डेयरी जैसे संवेदनशील सेक्टर्स को फिलहाल समझौते से बाहर रखा गया है, ताकि भारतीय किसानों के हित सुरक्षित रहें। यूरोपीय यूनियन को क्या मिलेगा?

EU के लिए भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। यह डील उसे भारत में लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजिक फुटहोल्ड दे सकती है।

EU के प्रमुख फायदे…..

  • यूरोपीय वाइन और शराब पर 150–200% तक टैक्स में कटौती
  • लग्जरी कारें और मशीनरी सस्ती
  • मेडिकल डिवाइसेज, केमिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स को आसान एंट्री
  • सरकारी खरीद (Government Procurement) में भागीदारी

इसके साथ-साथ EU चाहता है..

  • इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स पर सख्त नियम
  • लेबर और पर्यावरण मानकों पर स्पष्ट फ्रेमवर्क
  • निवेश की मजबूत सुरक्षा

इससे भारत में मैन्युफैक्चरिंग, क्लीन एनर्जी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन टेक्नोलॉजी में यूरोपीय निवेश बढ़ने की उम्मीद है।

रणनीतिक मायने: सिर्फ ट्रेड नहीं, जियो-पॉलिटिक्स

यह FTA सिर्फ टैरिफ और टैक्स की बात नहीं करता।
यह समझौता…

  • चीन पर निर्भरता कम करेगा
  • सप्लाई चेन को डाइवर्सिफाई करेगा
  • भारत-EU स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को नई ऊंचाई देगा

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह डील भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकती है।

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