IndiaRising : कभी भारत को दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक कहा जाता था, लेकिन आज वही भारत 80 से अधिक देशों को स्वदेशी हथियार बेचने वाली रक्षा शक्ति बन चुका है।
आर्मेनिया की सेना ने हाल ही में भारतीय ATAGS, PINAKA, AKASH, MArG-39 जैसे घातक हथियारों का भव्य प्रदर्शन किया, जो न सिर्फ दोनों देशों के बढ़ते रक्षा सहयोग का प्रतीक है, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का विश्व मंच पर ऐलान भी।
यह घटना भारत के रक्षा निर्यात के रिकॉर्डतोड़ सफर की कहानी कहती है, जो —2024-25 में 23,622 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार चुकी है।
इस सौदे की पृष्ठभूमि में पूर्व सोवियत संघ के गणराज्यों अजरबैजान और आर्मेनिया के युद्ध में रूस के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन समूह CSTO द्वारा आर्मेनिया से सुरक्षा संधि के वाबजूद उसे हथियारों की आपूर्ति से इंकार करना था, जबकि वो अजरबैजान को जम कर हथियार बेचे।
रूस से आर्मेनिया की 2022 में बनी इस दूरी ने भारत से 400 मिलियन डॉलर से अधिक के हथियार सौदों के द्वार खोल दिए।
आर्मेनिया ने जिन भारतीय हथियारों का प्रदर्शन किया, वह सिर्फ शोकेस नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक संदेश है।
ATAGS तोपखाने, पिनाका रॉकेट लांचर, आकाश एयर डिफेंस, MArG-39 मल्टी-बैरल ग्रेड, TRAJAN आर्टिलरी, रिमोट कंट्रोल्ड रोबोटिक वाहन, छोटे हथियार, लॉयटरिंग म्यूनिशन और एडवांस्ड ऑप्ट्रॉनिक्स—ये सब आर्मेनिया की आर्टिलरी व एयर डिफेंस की रीढ़ बन चुके हैं।
भारत के रक्षा निर्यात का ग्राफ देखें तो सांसें थम जायें – अब तक 80 देश जिनमें फिलीपींस, म्यांमार से लेकर अफ्रीकी देश शामिल हैं,भारतीय हथियारों के खरीददार बन चुके हैं।
भारतीय हथियारों का निर्यात 2023-24 के 2,325.45 मिलियन USD से बढ़ कर 2024-25 में 2,827 मिलियन USD पहुंच गये अर्थात गया अर्थात—21% से अधिक का अविश्वसनीय ग्रोथ!
इस निर्यात में अकेले प्राइवेट सेक्टर ने 1,650 मिलियन USD का योगदान दिया।
अब 2029 तक हथियार निर्यात का लक्ष्य 50,000 करोड़ सालाना का है।
‘आत्मनिर्भर भारत’ की इस जीत में —डीआरडीओ, डिफेंस पीएसयू और भारत फोर्ज जैसे प्राइवेट प्लेयर्स शामिल हैं।
