Jewar Airport : उत्तर प्रदेश के जेवर में शनिवार को देश के एविएशन सेक्टर के लिए ऐतिहासिक पल देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन किया। उनके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने एयरपोर्ट परिसर का निरीक्षण किया, तैयारियों की समीक्षा की और जनसभा को संबोधित करते हुए इसे ‘नए भारत की नई उड़ान’ बताया।
करीब 3300 एकड़ क्षेत्र में विकसित एयरपोर्ट का पहला फेज आधुनिक तकनीक और विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस है। एक रनवे के साथ ही यह एयरपोर्ट सालाना लगभग 3 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता रखेगा। इस चरण पर करीब 11 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट बनने की तैयारी
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को कुल 52 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकसित किया जाना है। सभी चरण पूरे होने के बाद यह एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनेगा, जो वर्तमान में चीन के बीजिंग डैक्सिंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट से भी बड़ा होगा। परियोजना को वर्ष 2040 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार मई से यहां उड़ानों का संचालन शुरू होने की संभावना है और यात्रियों को एंट्री के बाद सिर्फ 20 मिनट में बोर्डिंग सुविधा मिलेगी।
उत्तर प्रदेश बना 5 अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट वाला पहला राज्य
मई 2018 में केंद्र सरकार से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद शुरू हुई यह परियोजना चार चरणों में विकसित की जा रही है, जिसकी कुल लागत 29,560 करोड़ रुपये आंकी गई है। उद्घाटन के साथ ही उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहां पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे संचालित होंगे।
पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता
फेज-1 के विकास पर कंसेशनायर द्वारा 6,876 करोड़ रुपये और भूमि अधिग्रहण पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 4,406 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। कुल मिलाकर पहले चरण की लागत करीब 11,282 करोड़ रुपये रही, जिसमें शुरुआती क्षमता 1.2 करोड़ यात्रियों प्रतिवर्ष तय की गई है।
मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी से यात्रा होगी आसान
यह एयरपोर्ट देश का अत्याधुनिक मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब होगा, जहां सड़क, रेल, मेट्रो और क्षेत्रीय ट्रांजिट सिस्टम का एकीकृत नेटवर्क विकसित किया गया है। इससे यात्रियों और कार्गो ट्रांसपोर्ट दोनों के लिए समय और लागत में बड़ी कमी आएगी।
कार्गो हब और एमआरओ से मिलेगा औद्योगिक बढ़ावा
प्रधानमंत्री ने एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल का उद्घाटन और एमआरओ (मेंटिनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) सुविधा का शिलान्यास भी किया। मल्टी-मोडल कार्गो हब की शुरुआती क्षमता 2.5 लाख मीट्रिक टन सालाना होगी, जिसे भविष्य में 18 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाया जा सकेगा। 40 एकड़ में बनने वाली एमआरओ सुविधा से विमान मरम्मत कार्य देश में ही संभव होगा, जिससे एविएशन सेक्टर में आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।
रोजगार, उद्योग और पर्यटन को नई उड़ान
यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में विकसित हो रहा यह एयरपोर्ट औद्योगिक विकास, निर्यात, सेवा क्षेत्र और पर्यटन को नई गति देगा। इसके संचालन से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होने के साथ उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत आधार मिलेगा।
इस मौके पर केंद्रीय नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू, वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक सहित कई मंत्री और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब सिर्फ एक हवाई अड्डा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के आर्थिक और वैश्विक कनेक्टिविटी का नया प्रवेश द्वार बनने जा रहा है।
