- झारखंड ने मांगी 3 लाख 3 हजार करोड़ की आर्थिक सहायता
Jharkhand 16th Finance Commission : वित आयोग की टीम 28 मई से चार दिवसीय दौरे के लिए झारखंड दौर पर है. इस बार 16वें वित्त आय़ोग की टीम प्रदेश आय़ी है. जो हर पांच वर्षों में राज्य का दौरा कर यहां के वित्तिय स्थित का मूल्याकंन कर भारत सरकार को इसकी जरुरतों की अनुशंसा करती है. वित्त आय़ोग से राज्यों को काफी उम्मीदे रहती है. इस बार भी काफी आशाएं लगी हुई है.
शनिवार को हुई बैठक के दौरान 16वें वित्त आयोग के समक्ष राज्य सरकार की ओर से वित्त सचिव ने पावर प्वाईंट प्रेजेंटशन दिया. इसमें राज्य की आर्थिक स्थित की जानकारी दी गयी.
झारखंड सरकार ने 16वें वित्त आयोग के समक्ष राज्य की विशिष्ट परिस्थितियों से मुखातिब कराया औऱ विशेष आर्थिक सहायता के तौर पर तीन लाख तीन हजार करोड़ की मांग की है. सरकार ने आयोग के सामने तर्क दिया कि झारखंड खनिज-संपन्न राज्य होने के बावजूद विकास के कई मानकों पर पिछड़ा हुआ है. राज्य सरकार ने आयोग से आग्रह किया कि खनिज संसाधनों के दोहन से केंद्र सरकार को भारी राजस्व प्राप्त होता है, जबकि पर्यावरणीय का नुकसान, विस्थापन और सामाजिक असंतुलन जैसे खामियाजा झारखंड को झेलने पड़ते हैं. ऐसी हालात को देखते हुए राज्य को ‘विशेष श्रेणी का राज्य’ घोषित कर अतिरिक्त अनुदान देने की मांग की गई. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्य की सरकार ने केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी को 41% से बढ़ाकर 50% करने की मांग की है. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर और अन्य वरीय अधिकारियों ने 16वें वित्त आयोग की उच्चस्तरीय टीम के समक्ष यह मुद्दे उठाए. आयोग की यह टीम डॉ. अरविंद पनगढ़िया की अगुवाई में आई है. जिन्होंने होटल रेडिसन ब्लू में वित्त आय़ोग की बैठक की अध्यक्षता भी किया.
झारखंड सरकार ने मांगी विशेष सहायता राशि
वित्त आय़ोग से राज्य सरकार ने 1,200 करोड़ रुपये की विशेष सहायता की मांग की है, जिसका उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, कृषि, कौशल विकास और जिला सड़कों जैसे बुनियादी क्षेत्रों में किया जाएगा. हर जिले को 5 वर्षों तक 10 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव रखा गया है.
खनन क्षेत्रों के लिए विशेष सहायता की मांग
झारखंड में खदानों औऱ खनीजों से भरा प्रदेश है. इसके चलते ही सामाजिक और पर्यावरणीय नुकसान भी काफी होते हैं. इसकी भरपाई के लिए जल संरक्षण, सिंचाई और आधारभूत ढांचे के विकास हेतु अलग से सहायता मांगी गई है. इसके अलावा आयोग से राज्य सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए कानून-व्यवस्था, विकास और पुनर्वास के लिए अलग बजटीय प्रावधान की मांग की है. इसके अलावा पंचायती राज संस्थानों और शहरी स्थानीय निकायों की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए विशेष मदद की जरुरत जताई गई है.
खनन से होने वाली समस्या को गिनाया
झारखंड सरकार ने यह भी कहा कि राज्य की भौगोलिक और सामाजिक चुनौतियां योजनाओं को जमीन पर उतारने में बाधा उत्पन्न करती है. उन्होंने खनन के कारण उत्पन्न विस्थापन, पर्यावरणीय नुकसान और भूमि हानि के मुद्दों को गंभीरता से उठाया. इसके साथ ही आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की खनन कंपनियों द्वारा भूमि पुनर्जनन का काम योजना के मुताबिक नहीं हो रहा है. लिहाजा इसके लिए अधिक वित्तीय स्वायत्तता देने की वकालत की है.
आयोग ने भी समझी राज्य की बात
वित्त आयोग ने झारखंड सरकार की प्रस्तुतियों को गंभीरता से लिया. आयोग ने राज्य की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक विषमताओं को स्वीकार करते हुए कहा कि संसाधन वितरण में इन पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा. हालांकि, आयोग ने साफ किया कि ‘विशेष श्रेणी राज्य’ का दर्जा अब नीति आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन इस पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार लेगी।
आयोग ने राज्य सरकार की वित्तीय पारदर्शिता, कर संग्रहण की दक्षता, और विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की. राज्य सरकार ने GST से हुए नुकसान को भी अपनी प्रमुख चिंताओं में शामिल किया, जिसे आयोग ने ‘नए वैरिएबल’ के रूप में स्वीकार किया है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र से मिलने वाला शेष ग्रांट तभी जारी किया जाएगा जब राज्य सरकार पंचायत चुनाव सम्पन्न करवा देगी.
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने की अगुवाई
वित्त आय़ोग की टीम के सामने झारखंड सरकार के 23 विभागों ने मिलकर विस्तृत मेमोरेंडम तैयार किया था. जिसे आयोग के सामने पेश करने का प्लान बनाया गया था. यह मेमोरेंडम राज्य की राजस्व प्राप्तियों, केंद्र सरकार से प्राप्त अनुदान, केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी तथा सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसे पहलुओं पर आधारित है थी. राज्य की तरफ से वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर सरकार की तरफ से अगुवाई की.
