* गोसाईगांव सभा में CM हेमंत सोरेन का BJP पर तीखा हमला, बोले— जनता को सिर्फ वादे नहीं, अधिकार चाहिए
Jharkhand CM : असम विधानसभा चुनाव के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने भी राजनीतिक मैदान में अपनी ताकत झोंक दी है। जेएमएम प्रमुख और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कोकराझार जिले के गोसाईंगांव विधानसभा क्षेत्र में चुनावी अभियान की शुरुआत करते हुए पार्टी प्रत्याशी फ्रेडरिक्सन हांसदा के समर्थन में विशाल जनसभा को संबोधित किया। सभा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे।
“यह चुनाव बदलाव नहीं, अधिकार का अभियान”
हेमंत सोरेन ने आदिवासी इतिहास और संघर्ष की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि आदिवासी समाज ने कभी गुलामी स्वीकार नहीं की। उन्होंने कहा कि यह चुनाव केवल सरकार बदलने का नहीं, बल्कि आदिवासी, श्रमिक और वंचित समाज के अधिकारों को घर-घर तक पहुंचाने की लड़ाई है।
चुनावी लालच से सावधान रहने की अपील
जनसभा में उन्होंने मतदाताओं को चुनावी प्रलोभनों से सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि असली ताकत शिक्षा है और हर परिवार को अपने बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि शिक्षित समाज ही अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है।
चाय बागान मजदूरों के मुद्दे पर सरकार पर निशाना
हेमंत सोरेन ने असम के चाय बागान मजदूरों की स्थिति उठाते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देने के बावजूद उन्हें वर्षों से सिर्फ वादे मिले हैं, अधिकार नहीं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जेएमएम मजदूरों के हक की लड़ाई में उनके साथ खड़ी रहेगी।
भाजपा पर तीखा हमला
अपने भाषण में उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के समय लोगों के खातों में थोड़ी रकम डालकर वोट लेने की कोशिश की जाती है, लेकिन बाद में जनता को उसका लाभ नहीं मिलता। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल जनता को सिर्फ चुनावी जाल में फंसाते हैं।
झारखंड मॉडल की शिक्षा व्यवस्था का वादा
हेमंत सोरेन ने झारखंड की शिक्षा व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के कारण अब निजी स्कूलों से भी ज्यादा प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि असम में भी ऐसी ही मजबूत शिक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी ताकि गरीब और आदिवासी बच्चों को बेहतर अवसर मिल सके।
संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग पैसे और प्रभाव के दम पर संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग करते हैं। सोरेन ने कहा कि उनका लक्ष्य सिर्फ राजनीतिक भाषण देना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, प्रोफेसर और पत्रकार बनाकर वास्तविक सशक्तीकरण करना है।
उन्होंने बताया कि झारखंड में आदिवासी युवाओं की उच्च शिक्षा का पूरा खर्च सरकार उठाती है और इसी मॉडल को असम में लागू करने की जरूरत है, ताकि वंचित समाज को बराबरी का अवसर मिल सके।
