Jharkhand Politics : झारखंड में INDIA गठबंधन में ‘सांप-सीढ़ी’ का खेल शुरू

Sushmita Mukherjee

Jharkhand Politics : झारखंड की राजनीति में सियासी हलचल तेज हो गई है। सत्ताधारी INDIA गठबंधन के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं दिख रहा। बिहार चुनाव के बाद अब असम चुनाव और आगामी राज्यसभा चुनाव से पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के रिश्तों में खटास खुलकर सामने आने लगी है। दोनों दलों के नेताओं के तीखे बयान संकेत दे रहे हैं कि गठबंधन के भीतर ‘सांप-सीढ़ी’ का खेल अपने चरम पर पहुंच चुका है।

गठबंधन सरकार में बढ़ती तल्खी

राज्य में सत्ताधारी सहयोगी होने के बावजूद कांग्रेस और जेएमएम के बीच राजनीतिक दूरी लगातार बढ़ रही है। हाल के घटनाक्रमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अंदरूनी असंतोष अब सार्वजनिक मंचों तक पहुंच चुका है। नेताओं के बयान सीधे तौर पर एक-दूसरे की कार्यशैली और सरकार के संचालन पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

अपनी ही सरकार के खिलाफ कांग्रेस का आंदोलन

सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश तब मिला जब कांग्रेस ने माइनिंग माफिया और जिला प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन की घोषणा कर दी। यह आंदोलन विपक्ष के खिलाफ नहीं, बल्कि अपनी ही गठबंधन सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता नजर आया।
प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने आरोप लगाया कि राज्य में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था कमजोर है और करीब 70 हजार शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि प्रशासन और खनन व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो कांग्रेस सड़क पर उतरेगी।

समन्वय समिति गठन की मांग

कांग्रेस ने साफ संदेश दिया है कि सरकार चलाने में उसकी भागीदारी मजबूत होनी चाहिए। पार्टी ने राज्य समन्वय समिति और 20 सूत्री समितियों के जल्द गठन की मांग उठाई है। कांग्रेस चाहती है कि सरकार के बड़े फैसलों में गठबंधन सहयोगियों की औपचारिक भूमिका तय हो।

राजनीतिक जानकार इसे सत्ता संतुलन की लड़ाई मान रहे हैं, जहां कांग्रेस अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी और प्रभाव बढ़ाने की कोशिश में है।

कानून-व्यवस्था पर भी सरकार घिरी

विष्णुगढ़ में नाबालिग के साथ दुष्कर्म और धनबाद में एक व्यक्ति को रस्सी बांधकर घुमाने की घटनाओं ने सरकार को असहज कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने जिला प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया, वहीं राज्य की वित्त मंत्री ने भी अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या प्रशासन केवल बड़ी वारदात के बाद ही सक्रिय होगा। इन बयानों ने गठबंधन सरकार के भीतर असहमति को और उजागर कर दिया।

जेएमएम का पलटवार, बयानबाज़ी तेज

तनाव तब और बढ़ गया जब जेएमएम के एक वरिष्ठ नेता ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए उसे “सांप” तक कह दिया। यह बयान गठबंधन की आंतरिक राजनीति में गहराती अविश्वास की खाई को दर्शाता है।

राज्यसभा चुनाव बनेगा असली टेस्ट

अब सबकी नजर मई में संभावित राज्यसभा चुनाव पर टिकी है। झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होना है, जिसमें जीत के लिए 54 प्रथम वरीयता मतों की जरूरत होगी।

INDIA गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं….

जेएमएम: 34
कांग्रेस: 16
राजद: 4
माले: 2
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जेएमएम दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगा या एक सीट कांग्रेस को दी जाएगी। यही फैसला गठबंधन की वास्तविक स्थिति को उजागर करेगा।

राजनीतिक संकेत साफ

सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि राज्यसभा चुनाव गठबंधन के रिश्तों का ‘थर्मामीटर’ साबित होगा। अगर समझौता हुआ तो गठबंधन मजबूत दिखेगा, लेकिन टकराव बढ़ा तो झारखंड की राजनीति में बड़ा सियासी तूफान आने से इनकार नहीं किया जा सकता।फिलहाल झारखंड की सियासत में दोस्ती कायम है, लेकिन भरोसा डगमगाता हुआ नजर आ रहा है।

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