* उम्रकैद के बाद भी ‘आजाद’ गुनहगार: क्या कागजों तक सिमट गया नेशनल शूटर का इंसाफ?
Justice For Tara Shahdeo : रांची : एक तरफ निशानेबाजी के मैदान में अचूक लक्ष्य भेदने वाला जज्बा, और दूसरी तरफ धोखे, धर्म परिवर्तन के दबाव और दरिंदगी का वो काला जाल जिसने देश की एक होनहार बेटी के जीवन को नर्क बना दिया। यह कहानी सिर्फ तारा शाहदेव की नहीं है, बल्कि यह कहानी है व्यवस्था की उस विडंबना की, जहाँ 9 साल की लंबी कानूनी जंग और उम्रकैद की सजा के बावजूद दोषी आज खुले आसमान के नीचे घूम रहे हैं।
साजिश का ‘ब्लू प्रिंट’: प्यार के मुखौटे में रकीबुल का वार
साल 2014 में जब तारा अपनी माँ के निधन के शोक में डूबी थीं, तब उनकी भावनाओं का फायदा उठाकर रंजीत सिंह कोहली (मोहम्मद रकीबुल हसन) ने हमदर्दी का नाटक रचा। तत्कालीन हाईकोर्ट रजिस्ट्रार मुश्ताक अहमद की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शादी हुई। लेकिन सुहागरात की अगली सुबह ही ‘सिंदूर’ और ‘विश्वास’ का कत्ल हो गया। शुरू हुआ जबरन धर्मांतरण, बीफ खिलाने की कोशिश और कुत्तों से कटवाने जैसी अमानवीय प्रताड़ना का वो दौर, जिसे सुनकर रूह कांप जाए।
न्याय की ‘अधूरी’ जीत: CBI की मेहनत पर जमानत का ग्रहण?
30 सितंबर 2023 को जब CBI की विशेष अदालत ने रकीबुल को उम्रकैद सुनाई, तो लगा कि इंसाफ हो गया। लेकिन यह खुशी महज कुछ महीनों की मेहमान थी। मई 2024 में झारखंड हाईकोर्ट से मिली जमानत ने न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सवाल 1: क्या रकीबुल जैसे प्रभावशाली अपराधियों के लिए कानून की बेड़ियाँ इतनी कमजोर हैं?
सवाल 2: उम्रकैद का मतलब ‘ताउम्र जेल’ होता है, फिर चंद महीनों में ‘आजादी’ क्यों?
सवाल 3: क्या एक अकेली लड़ती महिला की सुरक्षा अब दांव पर नहीं है?
”मैंने आत्महत्या के बदले लड़ाई को चुना।” — तारा शाहदेव
आज की स्थिति: मार्च 2026 तक का कड़वा सच
तारा आज भी JSSPS में कोचिंग देकर नई पौध तैयार कर रही हैं, लेकिन उनका असली मुकाबला अभी भी अदालत की तारीखों और जमानत पर बाहर घूम रहे अपराधियों के खौफ से है। ‘The Kerala Story 2’ जैसी फिल्मों के मंच से अपनी आवाज बुलंद करने वाली तारा आज हर उस बेटी का चेहरा बन गई हैं जो ‘धोखे के निकाह’ और ‘साजिशी धर्मांतरण’ के खिलाफ खड़ी है।
