Kashi Vishwanath Jyotirling : एक ज्योतिर्लिंग में ही शिव जी के साथ देवी शक्ति की होती है पूजा, प्राचीन सप्तपुरियों में से एक है काशी

Sanat Kumar Dwivedi

Kashi Vishwanath Jyotirling : सावन में शिव जी के ज्योतिर्लिंगों और पौराणिक मंदिरों में दर्शन-पूजन करने का विशेष महत्व है। 12 ज्योतिर्लिंगों में सातवें नंबर पर है काशी विश्वनाथ। ये मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थापित है। वाराणसी का एक नाम काशी है। जानिए काशी विश्वनाथ से जुड़ी खास बातें…

काशी यानी वाराणसी प्राचीन सप्तपुरियों में से एक है। प्राचीन सप्तपुरियां यानी 7 सबसे पुराने नगर। इनमें अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांची, अवंतिका और द्वारिका शामिल हैं।

महाभारत में काशी का उल्लेख है। यहां के राजा काशिराज की तीन पुत्रियां थीं। अंबा, अंबालिका और अंबिका। इनका स्वयंवर होने वाला था, तब भीष्म ने इन कन्याओं का अपहरण कर लिया था। महाभारत युद्ध में काशिराज ने पांडवों का साथ दिया था।

11वीं से 15वीं सदी में देशभर के कई मंदिरों के साथ ही काशी विश्वनाथ का मंदिर भी तोड़ा था। बाबा विश्वनाथ का इतिहास हजारों साल पुराना है। बादशाह अकबर के बाद टोडरमल ने इस मंदिर पुनर्निर्माण करवाया था। औरंगजेब ने इस मंदिर को फिर तोड़ा दिया था। इसके कुछ दशकों के बाद इंदौर की राजकुमारी अहिल्या बाई ने इस मंदिर का जीर्णोद्वार करवाया था।

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के दो भाग हैं। दाहिने भाग में देवी शक्ति विराजमान हैं और एक भाग में शिव जी विराजमान हैं। इस वजह से एक ही ज्योतिर्लिंग में शिव जी और देवी शक्ति के दर्शन एक साथ हो जाते हैं।

ऐसी मान्यता है कि जिन लोगों की मृत्यु काशी में होती हैं, उन्हें दोबारा जन्म नहीं लेना पड़ता है। यहां मरने वाले लोगों को सीधा मोक्ष मिल जाता है।

काशी विश्वनाथ के संबंध में मान्यता है कि इस नगरी की रक्षा स्वयं शिव जी करते हैं। कलियुग के अंत में जब प्रलयकाल आएगा, तब भी काशी विश्वनाथ को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होगा।

माना जाता है कि इस मंदिर में स्थित शिवलिंग के दर्शन करने पर और गंगा में स्‍नान करने से भक्त को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस मंदिर से आदि शंकराचार्य, संत एकनाथ, रामकृष्ण परमहंस, स्‍वामी विवेकानंद, महर्षि दयानंद, गोस्‍वामी तुलसीदास का नाम भी जुड़ा हुआ है। इन सभी ने भी काशी विश्वनाथ के दर्शन किए थे।

काशी में गंगा, वरुणा और असी यानी अस्सी नाम की पवित्र नदियां बहती हैं। यहां पर वरुणा और अस्सी नदी के बहने के कारण ही इस नगर को वाराणसी भी कहा जाता है। यह दोनों नदियां यहां से बहती हुईं, आगे जाकर गंगा में मिल जाती हैं।

काशी के कई घाट बहुत प्रसिद्ध हैं। इनमें दशाश्वमेध घाट, मणिकार्णिका घाट, हरिश्चंद्र घाट और तुलसी घाट आदि शामिल हैं। इन घाटों का पौराणिक महत्व है।

18 पुराणों में से एक स्कंद पुराण में काशीखंड नाम का एक पूरा अध्याय है। काशी के बारह प्रसिद्ध नाम हैं – काशी, वाराणसी, अविमुक्त क्षेत्र, आनंदकानन, महाश्मशान, रुद्रावास, काशिका, तपस्थली, मुक्तिभूमि, शिवपुरी, त्रिपुरारि राज नगरी और विश्वनाथ नगरी।

कैसे पहुंचे काशी विश्वनाथ

देशभर के सभी बड़े शहरों से वाराणसी के लिए आवागमन के कई साधन मिल जाते हैं। यहां वायु, रेल और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं। काशी में रहने के लिए कई आश्रम, धर्मशालाएं और होटल्स आसानी से मिल जाती हैं। यहां का खाना भी काफी प्रसिद्ध है।

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