Krishna Janmashtami 2025 : नहीं आएंगे कृष्ण

Bindash Bol

ध्रुव गुप्त
(आईपीएस) पटना

Krishna Janmashtami 2025 : कल पूरी रात कृष्ण के बारे में पढ़ता और विचार करता रहा। लोगों के इस विश्वास के बारे में भी सोचा कि कलियुग में अधर्म बढ़ेगा तो उसका नाश करने कृष्ण एक बार फिर भारत भूमि पर आएंगे। भोर में जाकर आंख लगी तो कृष्ण मेरे सामने उपस्थित थे। हाथों में बांसुरी और होंठों पर मंद मुस्कान। मैने सीधा सवाल कर दिया – ’तो कब आ रहे हो, प्रभु ? उनका उत्तर भी सीधा था – ’तुम्हारे भारत की मेरी यात्रा द्वापर युग तक ही ठीक थी, वत्स ! तब धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश का प्रश्न उपस्थित था। कलियुग में स्थिति बदल चुकी हैं। अभी सत्ता पक्ष हो या विपक्ष – दोनों ही के मूल में अधर्म है। दोनों ही तरफ, शकुनियों, धृतराष्ट्रों, दुर्योधनों और दुःशासनों की भीड़ है। अधर्म ही अधर्म के विरुद्ध खड़ा है। अधिसंख्यक जन इन दोनों के मोहपाश में बंधकर सत्य, न्याय, समता, भाईचारे और प्रेम का मार्ग भूल चुके हैं। कभी युद्ध हुआ भी तो वह धर्मयुद्ध नहीं, अधर्मयुद्ध होगा। अधर्म ही अधर्म से लड़ेगा। अधर्म ही मरेगा, अधर्म ही मारेगा। अधर्म ही जीतेगा, अधर्म ही हारेगा। जब कहीं धर्म बच ही नहीं रहा तो यहां महाभारत रचने की भी क्या आवश्यकता है मुझे ?

मैने पूछा – ’तो क्या इस अधर्म से बचने का कोई मार्ग नहीं है, केशव ?’ उन्होंने कहा- ’ मार्ग तुम्हारे अपने भीतर ही है। कभी वहां झांककर अपने इस कन्हैया की प्रेम की बंसी सुनने का प्रयास करना। यह सुनाई दे जाय तो तुम्हें किसी अवतार की आवश्यकता नहीं होगी। तुम्हारी समस्त समस्याओं, पापों और चिंताओं से मुक्ति का रास्ता निकल आएगा। यह नहीं कर सको तो मेरा सुदर्शन चक्र भी तुम्हारे भीतर ही है। तब अपना अपना महाभारत स्वयं रचोगे और लड़-मरकर इस पृथ्वी को बोझ से मुक्त करोगे ! कल शायद तुमसे बेहतर मनुष्य इस पवित्र भूमि पर आएंगे।’

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