LANGUAGE DISPUTE : झारखंड में भाषा विवाद!

Bindash Bol

LANGUAGE DISPUTE : झारखंड में शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं की जिलावार सूची तैयार करने की प्रक्रिया के बीच एक लिस्ट की वजह से जारी विवाद को पाटने के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने स्पष्टीकरण जारी किया है. विभाग ने ड्राफ्ट लिस्ट पर जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा अधीक्षकों से सुझाव मांगते हुए स्पष्ट किया है कि यह प्रारूप जेटेट नियमावली, 2025 के गठन की प्रक्रिया का एक प्रारंभिक चरण मात्र है. सभी संबंधितों से सुझाव के बाद जरुरी प्रक्रियाओं का अनुपालन करते हुए जेटेट नियमावली, 2025 को अंतिम रूप दिया जाएगा.

पलामू, गढ़वा और खूंटी में क्यों हो रहा था विवाद

दरअसल, शिक्षा विभाग द्वारा तैयार की गई क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं की जिलास्तरीय सूची में बड़े पैमाने पर त्रुटि हुई है और कई भाषाओं की अनदेखी की गई है. इसकी वजह से राज्य में एक बार फिर भाषा विवाद खड़ा हो गया है. क्योंकि खूंटी में मुंडारी की जगह कुड़ुख और खड़िया भाषा को जनजातीय भाषा की श्रेणी में रखा गया है. वहीं पलामू और गढ़वा में हिंदी के बाद सबसे ज्यादा बोली जाना वाली भोजपुरी भाषा की जगह नागपुरी भाषा को क्षेत्रीय भाषा बताया गया है. पलामू और गढ़वा का मामला इतना गरमाया कि कांग्रेस नेता सह वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर को सीएम के नाम पत्र लिखकर इस त्रुटि की ओर ध्यान केंद्रीत कराना पड़ा.

किस वजह से पैदा हुआ विवाद

दरअसल, स्कूली एवं साक्षरता विभाग के प्राथमिक शिक्षा निदेशालय के संयुक्त सचिव नंद किशोर लाल के हवाले से सभी जिला सिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा अधीक्षकों को 5 जून 2025 को पत्र जारी किया गया था. इसके जरिए जेटेट नियमावली का प्रारुप तैयार करने के लिए गठित विभागीय समिति के द्वारा तैयार जेटेट नियमावली, 2025 के प्रारुप की कॉपी संलग्न की गई थी. विभाग ने संलग्न लिस्ट पर 7 दिन के भीतर सुझाव मांगा था.

झारखंड में अब तक दो बार हुई है शिक्षक पात्रता परीक्षा

बता दें कि राज्य गठन के बाद झारखंड में मात्र दो बार 2013 और 2016 में शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित की गई है. काफी जद्दोजहद के बाद पिछले वर्ष जैक ने इसके लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू की जिसमें 3.50 लाख विद्यार्थियों ने आवेदन किया. लेकिन जनजातीय भाषा और सिलेबस को लेकर अड़चनें आ गईं और सरकार ने तत्काल परीक्षा लेने पर रोक लगा दी. अब जिला स्तर पर क्षेत्रीय और जनजातीय भाषा की सूची तैयार की जा रही है, जिसमें अभ्यर्थियों को पास होना अनिवार्य है. लेकिन इस लिस्ट में गड़बड़ी की वजह से राज्य में भाषाई विवाद शुरू हो गया है.

क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं की फाइनल लिस्ट जारी होने पर किसी तरह का विवाद ना हो इसको ध्यान में रखते हुए विभाग ने 12 जून 2025 को ड्राफ्ट पर डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय शोध संस्थान, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग, जेसीईआरटी से भी सुझाव की मांग की है. विभाग ने राज्यवासियों से आग्रह किया है कि जेटेट नियमावली, 2025 का फाइनल गठन होने तक किसी प्रकार के भ्रम और संशय में ना रहें.

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