lifelessons : हानि लाभ की तराजू पर तय होता है पक्ष विपक्ष का खेल

Bindash Bol

रवि अग्रहरि

lifelessons : सदियों से होता आया है कि अक्सर लोग सत्य का साथ नहीं देते! कि कौन विवाद में पड़े, लोग जरूरत पड़ने पर किसी के साथ खड़े नहीं होते और न मदद को आगे आते हैं जबकि स्वयं के लिए चाहते बिना कहे लोग साथ दें!

यह सत्य है कि सबके लिए अच्छा होने में जरूरी नहीं कि मेरे अपने साथ भी अच्छा ही हो। प्रकृति में जैसे को तैसा टाइप, बदले की भावना से प्रेरित व्यवहार नहीं है लेकिन न्याय भी नहीं है ऐसा नहीं है।

महाभारत का द्युतक्रीड़ा याद होगा। द्रौपदी के चीर हरण के समय द्रौपदी के साथ जो नहीं खड़े थे, दरअसल वे अपने लाभ के साथ खड़े थे। या अन्य और आश्रय की वजह से विवश थे।

आज भी जब सही या गलत में से एक को चुनना होता है तो लोग पहले लाभ-हानि का आँकलन करते हैं, फिर अपना पक्ष तय करते हैं।

हस्तिनापुर की कुरुसभा में ही नहीं बल्कि आज के युग में भी कहीं किसी व्यक्ति के साथ कुछ गलत होता है तो तमाम लोग अपना लाभ हानि देखकर ही मौन/विरोध/समर्थन करते हैं।

नैतिकता के आधार पर पक्ष ना तो तब चुना गया था और ना अब चुना जाता है।

इसलिए, कहते हैं कि यदि आप प्रामाणिक मनुष्य हैं तो जीवन में जब भी अवसर मिले तो उसका साथ दीजिए जो सही हो। हो सकता हो थोड़ा नुकसान उठाना पड़े या थोड़ी पीड़ा हो लेकिन आत्मा पर भारी बोझ कभी नहीं होगा।

TAGGED:
Share This Article
Leave a Comment