Love : आओ प्यार करें

Bindash Bol

ध्रुव गुप्त
(आईपीएस) पटना
Love : पता नहीं मरने के बाद क्या होता है। कुछ होता भी है अथवा नहीं। धर्म कहते हैं कि हमें बनाने वाला एक ईश्वर है जो मरने के बाद हमारा इंसाफ करता है। अगर ऐसा है भी तो मुझे नहीं लगता कि हमारा न्याय इस आधार पर होता होगा कि हमने कितनी पूजा की, नमाज़ पढ़े या प्रार्थनाएं कीं। कितने मंदिर, मस्ज़िद या चर्च बनाए। कितने बकरों की कुर्बानियां दीं अथवा कितनी बलियां चढ़ाईं। या धर्मों के नाम पर कितने कत्लेआम किए। ये बातें ईश्वर ने नहीं बताई है। यह सब हमारी अपनी गढ़ी हुई बातें हैं। न्याय अगर होगा तो इस आधार पर होगा कि ईश्वर की बनाई इस दुनिया के साथ हमारा सलूक क्या रहा। उसके बनाए अन्य मनुष्यों और जीवों के साथ हमारे रिश्ते कैसे थे। हमने उसकी खूबसूरत प्रकृति को प्यार किया या बर्बाद। उसकी नेमतों का हमने जितना उपभोग किया, उतना ही उसे लौटाया कि नहीं ? इस दुनिया के सौंदर्य में हमने अपनी तरफ से कुछ जोड़ा या उसे थोड़ा बदरूप करके चले गए ?

ईश्वर को हम उसके हाल पर छोड़ दें। वह हमारी कृपाओं का मोहताज़ नहीं। उसने एक बहुत खूबसूरत दुनिया हमें सौंपी है और उससे बरतने का विवेक भी। इसके अलावा कोई और दुनिया, हमारा कोई और गंतव्य नहीं । आईए , हम प्यार करें अपनी इस दुनिया को ! इसके तमाम लोगों को। इसकी जैविक विविधता को। इसकी अद्भुत, जीवनदायिनी प्रकृति को। अपने हिस्से की कोशिशें से इसे थोड़ा और सुंदर बनाकर जाएं ताकि इंसाफ के दिन हमें ईश्वर के आगे शर्मिंदा न होना पड़े !

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