Mahakumbh 2025 : आस्था के महाकुंभ में कब आएंगे मोदी, अब तक 7 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

Sushmita Mukherjee

Mahakumbh 2025 : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 144 साल बाद महाकुंभ मेला लगा है। शनिवार को छठे दिन तक 7 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने पवित्र त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के मिलने की जगह) में स्नान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी महाकुंभ मेला में आने वाले हैं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका भी महाकुंभ में आएंगे। दोनों कांग्रेस नेता स्नान के बाद शंकराचार्य और संतों का आशीर्वाद लेंगे।

8 या 9 फरवरी को महाकुंभ मेला आ सकते हैं नरेंद्र मोदी

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 या 9 फरवरी को महाकुंभ मेला आ सकते हैं। वह पवित्र संगम में डुबकी लगाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की है और उन्हें महाकुंभ मेला में आमंत्रित किया है।

पहले शाही स्नान के दिन 3.5 करोड़ लोगों ने किया स्नान

महाकुंभ मेला 2025 का पहला अमृत स्नान (शाही या राजसी स्नान) 14 जनवरी को था। इस दिन 3.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान किया था। महाकुंभ मेला की शुरुआत 13 जनवरी को हुई थी।

29 जनवरी को है दूसरा अमृत स्नान

29 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर महाकुंभ मेला में दूसरा अमृत स्नान होगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को दूसरे अमृत स्नान को लेकर पूरी तैयारियां करने का निर्देश दिया है। उम्मीद की जा रही है कि इस दिन 8-10 करोड़ श्रद्धालु स्नान कर सकते हैं।

महाकुंभ के लिए उत्तर मध्य रेलवे चलाएगा 300 से अधिक ट्रेनें

उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) महाकुंभ के लिए तीर्थयात्रियों की भारी आमद को देखते हुए पूरी तरह से तैयार है। प्रयागराज आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 80 विशेष ट्रेनों सहित 300 से अधिक ट्रेनें चलाने की योजना है। एनसीआर के अधिकारी शशिकांत त्रिपाठी ने कहा, “हमने दो साल पहले महाकुंभ के लिए अपनी तैयारी शुरू कर दी थी। अब, हमारी तैयारियां उस स्तर पर पहुंच गई हैं जहां हम अपने सभी यात्रियों का आत्मविश्वास से स्वागत कर सकते हैं। हमारी लंबी दूरी की विशेष ट्रेनों ने 1 जनवरी को अपनी सेवाएं शुरू कीं, जिनमें 50 परिचालन शामिल हैं। हमारी रिंग रेल सेवाएं 10 जनवरी को शुरू हुईं।”

आस्था का अद्भुत संगम

तीर्थराज प्रयागराज में संगम तट पर सनातन आस्था और संस्कृति के महापर्व महाकुंभ का आयोजन हो रहा है। प्रयागराज का महाकुंभ विश्व का सबसे बड़ा मानवीय और आध्यात्मिक सम्मेलन है। यूनेस्को ने महाकुंभ को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत घोषित किया है। प्रयागराज महाकुंभ में मानवता के महापर्व में देश के कोने-कोने से अलग-अलग भाषा, जाति, पंथ, संप्रदाय के लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ त्रिवेणी संगम में डुबकी लगा रहे हैं। श्रद्धालु साधु संन्यासियों का आशीर्वाद ले रहे हैं, मंदिरों में दर्शन कर अन्नक्षेत्र में एक ही पंगत में बैठ कर भण्डारों में प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। एकता, समता, समरसता का महाकुंभ सनातन संस्कृति के उद्दात मूल्यों का सबसे बड़ा मंच है।

एकता का सबसे बड़ा मंच है महाकुंभ

महाकुंभ न केवल भारत की सांस्कृतिक विविधता में समायी हुई एकता और समता के मूल्यों का सबसे बड़ा प्रदर्शन स्थल है। जिसे दुनिया भर से आये पर्यटक और पत्रकार देख कर आश्चर्यचकित हुए बिना नहीं रह पाते। कैसे अलग-अलग भाषा भाषी, रहन-सहन, रिति-रिवाज को मानने वाले एकता के सूत्र में बंधे संगम में स्नान करने चले आते हैं। साधु-संन्यासियों के अखाड़े हो या तीर्थराज के मंदिर और घाट बिना रोक टोक श्रद्धालु दर्शन,पूजन करने जा रहे हैं। संगम क्षेत्र में चल रहे अनेकों अन्नभण्डार सभी भक्तों, श्रद्धालुओं के लिए दिनरात खुले हैं। जहां सभी लोग एक साथ पंगत में बैठ कर प्रसाद और भोजन ग्रहण कर रहे हैं। महाकुम्भ मेले में भारत की विविधता इस तरह समरस हो जाती है कि उनमें किसी तरह का भेद कर पाना संभव नहीं है।

महाकुंभ एकता, समता, समरसता के महाकुंभ का सबसे बड़ा उदाहरण

महाकुम्भ में सनातन परंपरा को मनाने वाले शैव, शाक्त, वैष्णव, उदासीन, नाथ, कबीरपंथी, रैदासी से लेकर भारशिव, अघोरी, कपालिक सभी पंथ और संप्रदायों के साधु,संत एक साथ मिलकर अपने-अपने रिति-रिवाजों से पूजन-अर्चन और गंगा स्नान कर रहे हैं। संगम तट पर लाखों की संख्या में कल्पवास करने आये श्रद्धालु देश के कोने-कोने से अलग-अलग जाति, वर्ग, भाषा को बोलने वाले हैं। यहाँ सभी साथ मिलकर महाकुम्भ की परंपराओं का पालन कर रहे हैं। महाकुम्भ में अमीर, गरीब, व्यापारी, अधिकारी सभी तरह के भेदभाव भुलाकर एक साथ एक भाव में संगम में डुबकी लगा रहे हैं। महाकुम्भ और मां गंगा नर, नारी, किन्नर, शहरी, ग्रामीण, गुजराती, राजस्थानी, कश्मीरी, मलयाली किसी में भेद नहीं करती। अनादि काल से सनातन संस्कृति की समता,एकता कि ये परंपरा प्रयागराज में संगम तट पर महाकुम्भ में अनवरत चलती आरही है। सही मायनों में प्रयागराज महाकुम्भ एकता,समता,समरसता के महाकुम्भ का सबसे बड़ा उदाहरण है।

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