Mahakumbh 2025 : महाकुंभ में संगम सहित गंगा के सभी घाटों पर स्नान, ध्यान और दान जारी है। श्रद्धालु और कल्पवासी मेला में स्नान और ध्यान कार्य जारी रखे हुए हैं। मेला के अंदर आवागमन पूरी तरह से सामान्य है। प्रयागराज शहर और जिले के अंदर भी गाड़ियों का आवागमन पूरी तरह से जारी है। इसके साथ 3 तारीख को होने वाले बसंत पंचमी के अमृत स्नान के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई है। अब तक जहां करोड़ों श्रद्धालु महाकुंभ के अवसर पर आस्था की डुबकी लगा चुके हैं, वहीं बिंदास बोल न्यूज़ के संवाददाता ने पुरी पीठाधीश्वर और जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती से एक्सक्लूसिव बातचीत की। इस बातचीत में स्वामी जी ने महाकुंभ की विशेषता, सनातन धर्म और सनातन बोर्ड,
धर्म का राजनीतिकरण पर गहरी और स्पष्ट बात की। उन्होंने यह भी बताया कि धर्म का मूल उद्देश्य सिर्फ आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज और जीवन के हर पहलू में संतुलन बनाए रखने का मार्गदर्शन देता है। आइए जानते हैं कि स्वामी जी ने इन मुद्दों पर क्या कहा….
संगम क्षेत्र में हादसा हो गया, कई लोगों की जान चली गई। आप क्या कहेंगे?
अमृत स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालु सतर्क और संयमित रहें। व्यवस्था की विफलता के कारण हादसा हुआ। केवल घोषणा से आदमी नियंत्रित हो जाएगा, ऐसा सोचा गया था। सीएम ने दुख व्यक्त किया, रोने लग गए। भावुकता के वशीभूत होकर अध्यात्म में मनोरंजन का अतिक्रमण न करें। दुर्घटना न हो, इसके लिए सावधान होने की आवश्यकता है। मैं शंकराचार्य हूं।
मैंने मौनी अमावस्या पर संगम में स्नान किया, ताकि मेरे कार्य की वजह से कोई घटना न हो। अमृत स्नान में संतों ने विवेकपूर्ण तरीके से स्वयं को रोककर रखा, ताकि उपद्रव न हो। घटना की सूचना के बावजूद जनता ने धैर्य का परिचय देते हुए स्नान किया। यह हिंदुओं की स्थिति है कि श्रद्धा में कमी नहीं आई। ईश्वर पीड़ित परिजनों को दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करे।
उन्होंने कहा कि “श्रद्धालुओं की आस्था बहुत गहरी है और वे जीवन-मरण की चिंता किए बिना कुंभ में आते हैं, लेकिन प्रशासन को चाहिए कि वे बेहतर भीड़ नियंत्रण व्यवस्था करें ताकि ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।”
स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि कि धर्म का उद्देश्य केवल आस्था और पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के हर पहलू में संतुलन बनाए रखने का एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
सनातन धर्म के खिलाफ चल रहे कुचक्र के विषय में आपकी क्या राय है।
उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि सनातन धर्म के विरुद्ध सोशल मीडिया के माध्यम से चल रहे कुप्रचार पर रोक लगनी चाहिए। आस्था खिलवाड़ का विषय नहीं हो सकता। महाकुंभ के विषय में भ्रम फैलाना अपराध है। इससे सनातन धर्म पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सनातन धर्म एक प्रवाह है। मानव जीवन का प्रवाह है सनातन धर्म।
सनातन बोर्ड पर आपकी क्या राय है?
शंकराचार्य अपने दायित्वों का निर्वहन करें तो इसकी आवश्यकता क्या है। ऐसी कौन सी समस्या है, जिसका समाधान हम लोगों के यहां नहीं हो सकता है। विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र संघ के साथ मिलकर मैंने कई समस्याएं सुलझाई हैं। लेकिन, अलग से लकीर खींचने का चलन हो गया है। हमारी उपेक्षा की गई। फिर भी मैं मुस्कुराता रहता हूं। वहीं, नकली शंकराचार्य अपनी थाती के लिए पैसा बनाते हैं या खुद को पूजवाने की भावना ज्यादा रखते हैं।
महाकुम्भ की व्यवस्था आपको कैसी लग रही है, क्या कहना चाहेंगे ?
मैं मेला तो घूमा नहीं हूं। सुना है योगी आदित्यनाथ ने पूरी तत्परता का परिचय दिया है, उपेक्षा नहीं की है। योगी और मोदी में अच्छा तालमेल भी है। व्यवस्था की दृष्टि से ठीक है लेकिन अराजकतत्व भी शंकराचार्य बने हैं। संभल में योगी ने जो ठोस कदम उठाया यदि महाकुम्भ में भी वही कदम उठाते तो अराजकतत्व शंकराचार्य बनकर न घूमते। उल्टे ऐसे शंकराचार्य को गनर देकर प्रश्रय दिया जा रहा है।
सनातन धर्म के सामने क्या चुनौतियां हैं। धर्मांतरण रोकने के लिए क्या उपाय होने चाहिए?
सनातन धर्म के सामने कोई चुनौतियां नहीं हैं। चुनौतियां तो उनके सामने हैं जो सनातन धर्म को नहीं मानते। धर्मातरण को रोकने के लिए हर हिंदू परिवार से एक रुपये और एक घंटा समय रोज निकले। मठ मंदिर या अपने घर को केंद्र बनाकर कार्य करें। यह ध्यान रखें कि आर्थिक विपन्नता के कारण कोई धर्मातरण का शिकार न होने पाएं। हिंदुओं का धर्मातरण कराने वालों पर सख्ती से प्रतिबंध लगे।
धर्म का राजनीतिकरण और राजनीतिज्ञों का धर्माचार्यों पर दबाव को आप कैसे देखते हैं।
स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने धर्म का राजनीतिकरण करने की कोशिशों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि धर्म का असली उद्देश्य राजनीति से ऊपर होता है। उन्होंने राजनीतिज्ञों के प्रयासों पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि “धर्म का राजनीतिकरण समाज की भलाई के लिए नहीं बल्कि सत्ता के स्वार्थ के लिए किया जा रहा है।” उनका मानना है कि धार्मिक नेताओं को राजनीति से दूर रहकर सिर्फ आध्यात्मिक मार्गदर्शन देना चाहिए, ताकि समाज को सही दिशा मिल सके।
महाकुम्भ दुनिया को क्या संदेश देता है ?
सबके पूर्वज सनातनी वैदिक आर्य हिंदू थे। अपना जीवन ऐसा हो जो सबके हित में प्रयुक्त और विनियुक्त हो। अपने-अपने देश की भक्ति तो होनी ही चाहिए किंतु पूरा विश्व दिव्यता का रूप धारण करे और मनुष्य सुसंस्कृत, सुरक्षित, संरक्षित, संपन्न सेवा पारायण, स्वस्थ सर्वहितोपयोगी बने।