Mahakumbh 2025: माघ पूर्णिमा और शिवरात्रि के दिन को क्यों नहीं कहा जा रहा है अमृत स्नान?

Sanat Kumar Dwivedi

Mahakumbh 2025 : जब सूर्य मकर राशि में होते हैं और गुरु वृषभ राशि में होते है तभी शाही स्नान किए जाते हैं, माघ पूर्णिमा को गुरु तो वृषभ राशि में रहेंगे लेकिन सूर्य कुंभ राशि में गोचर कर जाएंगे। वहीं, शिवरात्रि के दिन भी सूर्य कुंभ राशि में रहेंगे, ऐसे में यह पवित्र स्नान तो रहेगा, लेकिन इसे अमृत स्नान का दर्जा नहीं मिलेगा।

जी हां हम बात कर रहे हैं प्रयागराज में लगे महाकुंभ की। महाकुंभ में कल बसंत पंचमी का तीसरा अमृत स्नान किया गया। अब महाकुंभ में अगला पवित्र स्नान माघ पूर्णिमा पर किया जाएगा। ये पांचवां अमृत स्नान नहीं होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि माघ पूर्णिमा के दिन गुरु तो वृषभ राशि में रहेंगे, लेकिन सूर्य कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। ऐसे में ये माघ पूर्णिमा का पवित्र स्नान तो माना जा रहा है, लेकिन इसे अमृत स्नान का दर्जा नहीं दिया जा रहा है। महाशिवरात्रि को भी पवित्र स्नान तो है लेकिन अमृत स्नान का दर्जा नहीं दिया जा रहा है।

हिन्दू धर्म में पूर्णिमा और शिवरात्रि तिथि बहुत विशेष मानी गई है। मान्यता के अनुसार, पूर्णिमा के दिन स्नान और दान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु और भोलेनाथ का पूजन किया जाता है। साथ ही इस दिन व्रत भी रखा जाता है। इस बार महाकुंभ में 144 साल बाद शुभ संयोग का निर्माण हो रहा है। जिसमें महाकुंभ का चौथा पवित्र स्नान किया जाएगा। और शिवरात्रि के दिन महाकुंभ का अंतिम पवित्र स्नान किया जाएगा।

गौरतलब है कि 13 जनवरी से शुरू हुआ महाकुंभ 26 फरवरी को खत्म हो रही है। इस दौरान सिर्फ 3 दिन को ही अमृत स्नान का दर्जा दिया गया है हालांकि कुछ लोग इसे लेकर कंफ्यूज कर रहे हैं कि आगे भी 2 अमृत स्नान है, लेकिन आइए हम आपको इस कंफ्यूजन से दूर करते हैं।

माघ पूर्णिमा और शिवरात्रि के दिन को पवित्र स्नान तो है लेकिन अमृत स्नान का शुभ योग नहीं है। ऐसे में श्रद्धालु कंफ्यूज न हों इसके लिए हम आपको इसका कारण भी बताने जा रहे हैं कि आखिर इन दोनों तिथियों पर अमृत स्नान क्यों नहीं हो रहा है?

नहीं करेंगे दोनों तिथियों पर नागा अमृत स्नान

मुगलों के काल से नागा साधुओं को खास सम्मान देने के लिए विशेष शाही स्नान का दर्जा दिया गया था। आदि शंकराचार्य ने धर्म के रक्षक के तौर नागा साधुओं की टोली बनाई थी और माना जाता है कि उनके द्वारा ही नागा साधुओं को पहले स्नान करने का दर्जा भी दिया गया था। ऐसे में नागा संत आज बसंत पंचमी के अमृत स्नान के बाद अपने-अपने धाम को लौटने लग जाएंगे। यहां सिर्फ कल्पवासी संत ही संगम तट पर आपको दिखेंगे।

बड़ा कारण है ग्रह नक्षत्र

  1. जब सूर्य मकर राशि में होते हैं और गुरु वृषभ राशि में होते है तभी शाही स्नान किए जाते हैं, माघ पूर्णिमा को गुरु तो वृषभ राशि में रहेंगे लेकिन सूर्य कुंभ राशि में गोचर कर जाएंगे। वहीं, शिवरात्रि के दिन भी सूर्य कुंभ राशि में रहेंगे, ऐसे में यह पवित्र स्नान तो रहेगा, लेकिन इसे अमृत स्नान का दर्जा नहीं मिलेगा।
  2. बता दें कि सूर्य जब मकर राशि में होते और गुरु वृषभ राशि में होंगे तभी प्रयागराज में कुंभ मेला लगता है और शाही स्नान किया जाता है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। बिंदास बोल न्यूज़ एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।

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