Mahakumbh 2025 : दुनिया का सबसे पुराना धर्म सनातन है। सनातन का मतलब शाश्वत या ‘सदा बना रहने वाला धर्म। इस धर्म का सबसे बड़ा संगम प्रयागराज में हो रहा है। जहां इस धर्म से जुड़े हर जाति के लोग एक समान गंगा में डुबकी लगा रहे हैं।
सनातन पूरी दुनिया में फैले इस लक्ष्य को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयास अब रंग ला रहे हैं। यह पहला कुंभ है जब 40 देशों में सनातन का प्रचार कर रहे महामंडलेश्वर और उनके अनुयायी कुंभ में पूरे समय कल्पवास कर रहे हैं और अन्य देशों से सनातन में आस्था रखने वाले अपने भक्तों को बुलाकर पवित्र संगम में अमृत स्नान करा रहे हैं, जबकि इन्हें हिंदी नहीं आती, पर संस्कृत के श्लोक याद हैं, जिनका यह सस्वर पाठ करते हैं।
मालूम हो कि प्रयागराज महाकुंभ के सेक्टर-17 में निर्मोही अनी अखाड़े से जुड़ीं साईं मां का आश्रम है। यह आश्रम शक्ति धाम नाम से जाना जाता है। इसमें 40 से ज्यादा देशों के भक्त हैं, जिनमें नौ महामंडलेश्वर हैं, ये सभी विदेशी हैं। इसमें कोई अमेरिका में डॉक्टर रहा, तो कोई जापान में टीचर। ये सभी अपने-अपने देशों में ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए सनातन धर्म का प्रचार कर रहे हैं।
कुंभ में विदेशी महामंडलेश्वरों की अगुवाई कर रहीं साईं मां का पूरा नाम मीराबाई सर्वानंदमयी लक्ष्मी देवी साईंं मां मिश्रा है। जन्म मॉरीशस में हुआ। परवरिश फ्रांस में हुई और अब अमेरिका में रहती हैं। वह विष्णु-स्वामी वंश के अखिल भारतीय श्री पंच निर्मोही अनी अखाड़े से जुड़ी हैं।
इसके अलावा इस पंडाल में अनंत दास इकलौते महामंडलेश्वर जो हिंदी बोलते हैं। इनका जन्म अमेरिका में हुआ। वह बताते हैं कि 2010 में अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में फाइनेंस की पढ़ाई कर रहा था। बाद में मुझे साईं मां मिलीं। उनसे हमने साधना, मंत्र और सत्संग सीखा। इसके बाद हमने यह समझा कि सनातन ही सत्य है और इसे अपना लिया। अनंत 2019 में महामंडलेश्वर बनाए गए। वाराणसी के शक्तिधाम आश्रम में ही रहते हैं।
इसके बाद नंबर आता है महामंडलेश्वर श्री देवी मां का, जो साउथ अमेरिका की रहने वाली हैं और पिछले 22 वर्षों से सनातन धर्म से जुड़ी हैं। वहीं स्वामी परमेश्वर दास भी अमेरिका के रहने वाले हैं। साईं मां के आश्रम के सबसे पुराने संन्यासी और महामंडलेश्वर। पिछले 30 सालों से वह साईंं मां से जुड़े हैं। वह शक्तिधाम फाउंडेशन के आध्यात्मिक सलाहकार भी हैं। वह साइकोलॉजी पर अब तक 6 किताबें लिख चुके हैं। वहीं एक्टर-म्यूजिशियन बनीं महामंडलेश्वर अब साइकोलॉजी पढ़ाती हैं। यूएसए के कोलोराडो की ललिता श्री मां कहती हैं, ‘मैं पिछले 20 साल से संन्यासी जीवन जी रही हूं। उसके पहले मैं स्टूडेंट थी। उस वक्त साईं मां से मिली तो जीवन का उद्देश्य पता चला। मोक्ष के लिए मैंने सनातन धर्म अपना लिया।
इजराइल से आए महामंडलेश्वर दयानंद दास भी साईं मां से मिलने के बाद संन्यासी हो गए और सनातन धर्म अपना लिया। दयानंद से हमने पूछा कि जब आप अपने देश जाते हैं तो क्या पढ़ाते हैं। वह कहते हैं, इजराइल में मैं युवाओं को सनातन धर्म, योग, प्राणायाम, टेक्नोलॉजी पढ़ाता हूं। कुंभ मुझे बहुत पसंद है। दुनिया के किसी भी हिस्से में ऐसा नहीं है। यह हमारा और इस देश के लोगों का इमोशन है।
महामंडलेश्वर राजेश्वरी मां पेशे से डॉक्टर हैं और अब सनातन धर्म का प्रचार कर रही हैं। जापान के टोक्यो शहर की रहने वाली महामंडलेश्वर राजेश्वरी मां ने बताया कि उनके साथ बहुत सारे स्टूडेंट जापान से आए हुए हैं और वह यहां अध्यात्म और साधना की शिक्षा ले रहे हैं।
इन महामंडलेश्वर के अलावा तीन और महामंडलेश्वर हैं। एक अमेरिका के फ्लोरिडा के त्रिवेणी दास महाराज, दूसरे फ्रांस निवासी महामंडलेश्वर जयेंद्र दास महाराज और तीसरे जीवन दास महाराज। त्रिवेणी दास महाराज दुनियाभर में सनातन धर्म का प्रचार करने के लिए जाते हैं। वहीं, जीवन दास साइकोलॉजिस्ट हैं। डिप्रेशन में जा चुके युवाओं को पिछले 20 साल से ट्रेनिंग देते आ रहे हैं। 2019 में उन्हें महामंडलेश्वर बनाया गया था।
सनातन के पैरोकार बने महामंडलेश्वरों के आश्रम में 40 से ज्यादा देशों के भक्त हैं। आज सभी सनातन धर्म अपना चुके हैं। अब सभी शाकाहारी हैं। सभी एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। साईं मां अपने विदेशी भक्तों को प्रवचन देती हैं। यह प्रवचन अंग्रेजी में ही होता है।