Make In India : आसमान में ‘मेक इन इंडिया’: HAL-रूस डील से भारत बनाएगा अपना पैसेंजर जेट SJ-100

Bindash Bol
  • अब भारत सिर्फ फाइटर जेट नहीं, पैसेंजर जेट भी बनाएगा
  • रूस की तकनीक, भारत की फैक्ट्री और उड़ान ‘आत्मनिर्भरता’ की
  • बोइंग-एयरबस के बाद अब एशिया से उठेगी नई चुनौती
  • Wings India 2026 से उड़ा भारत का सबसे बड़ा एविएशन सपना

Make In India : भारत की एयरोस्पेस इंडस्ट्री एक नए युग में प्रवेश करने जा रही है। हैदराबाद में आयोजित Wings India 2026 एयर शो के दौरान हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रूस की United Aircraft Corporation (UAC) के बीच हुई ऐतिहासिक साझेदारी ने भारत को वैश्विक पैसेंजर एयरक्राफ्ट निर्माण की दौड़ में ला खड़ा किया है। इस समझौते के तहत भारत में SJ-100 रीजनल पैसेंजर जेट का निर्माण, बिक्री और मेंटेनेंस किया जाएगा।
SJ-100 दरअसल रूस के प्रसिद्ध Sukhoi Superjet 100 (SSJ100) का उन्नत और पूरी तरह ‘स्वदेशी’ संस्करण है। पुराने SSJ100 में करीब 70 प्रतिशत पुर्जे पश्चिमी देशों से आते थे, लेकिन 2022 के बाद लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने रूस को मजबूर किया कि वह इस विमान को पूरी तरह अपनी तकनीक पर आधारित बनाए। इसी बदलाव के बाद नया नाम सामने आया—SJ-100।
यह एक छोटा-मध्यम दूरी का रीजनल जेट है, जिसे खासतौर पर 70 से 100 यात्रियों के लिए डिजाइन किया गया है। भारत जैसे विशाल और विविध भौगोलिक देश में, जहां छोटे शहरों और क्षेत्रीय हवाई अड्डों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, ऐसे विमानों की मांग भविष्य में और बढ़ने वाली है।
अक्टूबर 2025 में शुरू हुई HAL-UAC की बातचीत जनवरी 2026 में फाइनल एग्रीमेंट में बदल गई। इस समझौते के तहत HAL को भारत में SJ-100 बनाने, बेचने और उसकी मरम्मत (MRO) करने का अधिकार मिलेगा। रूस की UAC भारत में फैक्ट्री स्थापित करने, डिजाइन ट्रांसफर करने, विशेषज्ञ भेजने और जरूरी एविएशन सर्टिफिकेशन दिलाने में पूरी मदद करेगी।
इस डील का रणनीतिक महत्व बेहद बड़ा है। अब तक भारत पैसेंजर विमानों के लिए बोइंग और एयरबस जैसी विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहा है। लेकिन SJ-100 के भारत में निर्माण से न केवल यह निर्भरता कम होगी, बल्कि एविएशन सप्लाई चेन, स्किल डेवलपमेंट और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
लोकल मैन्युफैक्चरिंग और मेंटेनेंस के चलते विमानों की लागत घटेगी, जिससे क्षेत्रीय उड़ानों के किराए भी कम हो सकते हैं। यह योजना सरकार की UDAN स्कीम और आत्मनिर्भर भारत अभियान को सीधा मजबूती देती है।
संक्षेप में, यह समझौता सिर्फ एक विमान बनाने की डील नहीं, बल्कि भारत को पैसेंजर जेट मैन्युफैक्चरिंग क्लब में शामिल करने की ऐतिहासिक छलांग है।

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