Minority related issues and Modi sarkar: मोदी सरकार के तीन कार्यकाल में अल्पसंख्यक समाज से जुड़े कई फैसले हुए हैं जिनका काफी विरोध हुआ, आंदोलन हुए लेकिन इसे लागू किया गया। नागरिकता संशोधन एक्ट हो या तीन तलाक का मामला या यूसीसी, हर बार व्यापक विरोध और आंदोलन हुए लेकिन उसे सरकार ने बहुमत के आधार पर लागू कर लिया। अब एक बार फिर मोदी सरकार विवादित वक्फ संशोधन बिल पास कराने जा रही है। भारी विरोध और बहस के बीच सरकार रणनीतिक रूप से इसे पास कराने के लिए आश्वस्त है।
अल्पसंख्यक वर्ग नाराज लेकिन चुनावी राजनीति में असरकारी नहीं
2014 में पहली बार बनी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार अब अपना तीसरा कार्यकाल शुरू कर चुकी है। संसद में मोदी सरकार ने इस बार वक्फ संशोधन बिल लाया है। इसका भारी विरोध हो रहा है। विपक्षी दल एकजुट हैं लेकिन देश की कई लिबरल पार्टियां वर्तमान में एनडीए के साथ खड़ी है। नीतीश कुमार की बिहार की जेडीयू हो या आंध्र प्रदेश की चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी, दोनों बिल के समर्थन में हैं। और इन दोनों दलों के एनडीए के साथ होने की वजह से न ही सरकार पर कोई खतरा हो सकता न ही बिल पास कराने में कोई कठिनाई। हालांकि, पूर्व में अल्पसंख्यक समाज से जुड़े मुद्दों पर कठोरता के साथ बिल लाना और उसे विरोध के बाद भी संसद में पास कराने के बाद भी बीजेपी या एनडीए को पिछले दो लोकसभा चुनावों में कोई खास असर नहीं रहा है। यही वजह है कि एक बार फिर मोदी सरकार विवादित वक्फ बिल को सदन में पास कराने जा रही है।
तीन तलाक
मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में तत्कालीन कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने 2017 में तीन तलाक संबंधित बिल पेश किया था। लोकसभा में मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2017 पेश किया गया। इस बिल का उद्देश्य तीन तलाक को अवैध घोषित करना था। यह कानून मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को संरक्षित करने और पतियों की मनमानी व तलाक से बचाने के लिए था। माना गया कि मुस्लिम समाज की महिलाओं ने इसे सराहा था। इस कानून के लागू होने के बाद तीन तलाक को अवैध करार दिया गया और ऐसा करने वाले पतियों को तीन साल तक की सजा का प्रावधान किया गया। तमाम धरने प्रदर्शन और विरोध हुए लेकिन सरकार ने इसे लागू किया और जुलाई 2019 में यह कानून बन गया।
नागरिकता संशोधन कानून 2019
नागरिकता संशोधन कानून को भी 2019 में पारित कराया गया। इसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में रहने वाले हिंदू, सिख, जैन, पारसी, ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता देना था। इस कानून के दायरे में मुसलमानों को बाहर रख गया। इसका विरोध हुआ, हिंसक प्रदर्शन और आंदोलन हुए लेकिन सरकार ने लागू किया।
यूसीसी
यूनिफार्म सिविल कोड भी बीजेपी का एजेंडा है। समान नागरिक कानून को भी बीजेपी शासित राज्यों में लागू किया जा रहा है। इसका भी मुस्लिम सजा भारी विरोध कर रहा है लेकिन लागू किया जा रहा है। हालांकि, अभी इसे केंद्रीय स्तर पर लागू नहीं किया गया है लेकिन सरकार का दावा है कि जल्द ही इसे भी लागू किया जाएगा। इस कानून के लागू होने के बाद सभी धर्मों को एक समान नागरिक कानून के तहत लाया जाएगा।
अब वक्फ संशोधन बिल
ताजा विवाद वक्फ संशोधन बिल को लेकर है। इस बिल को लाकर वक्फ की संपत्तियों के प्रबंधन और ऑपरेशन में कई तरह के बदलाव किए जाएंगे। इस कानून के लागू होने के बाद वक्फ बोर्ड में भी कई अहम बदलाव होंगे जिससे एकाधिकार खत्म होने की बात कही जा रही है। बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की एंट्री का सरकार ने प्रावधान कर दिया है।