आनंद शर्मा
Mohammed Siraj : वो रोजाना अमूमन 8 बजे उठता था पर आज उसकी नींद 6 बजे ही खुल गई। आज मैच के फैसले का दिन था, कल उससे एक बड़ी चूक हो गई थी। हेरी ब्रुक जब 19 रन पर थे तब उसका एक कैच लेने के बाद वो अपना संतुलन बरकरार नहीं रख सका और उसका पाँव बाउंड्री रोप को छू गया। उसी ब्रुक ने सेंचुरी मार भारत को हार के मुहाने पर ला खड़ा किया था। उसे पता था यदि भारत हारा तो हार का ठीकरा उसी के सर फूटेगा और वो इस मैच का विलेन करार दे दिया जाएगा। अपनी ही टीम के लिए हार की वज़ह बन जाने की पीड़ा असहनीय होती है किसी खिलाड़ी के लिए।
बस यही वो समय था जब उसका मन दोराहे पर खड़ा था। बीते कल की गलती और कुंठा को सोचने का या आने वाले पल में कुछ करने के संकल्प का, उसने दूसरा रास्ता चुना। गूगल सर्च किया, रोनाल्डो की तस्वीर वाली bilive की एक इमोजी निकली, उसे अपना वॉल पेपर बनाया और ख़ुद से कहा – मैच अभी ख़त्म नहीं हुआ है और मैं भारत के लिए इसे अब भी जीत सकता हूँ। यहाँ उसने एक और बात कमाल की सोची, उसने ये नहीं सोचा की मैदान में जाऊँगा और तेज गेंदे फेकूंगा, बाउंसर से विपक्षीयों को दहलाऊंगा। उसने सोचा अपनी पुरी क्षमता से सटीक लाईन लेंथ मेंटेन करूँगा। उसने अपनी बैचेनी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया बल्कि अपनी ताकत बना लिया।
वो मैदान पर उतरा, इंग्लैंण्ड को जीत के लिए महज 35 रन चाहिए थे और अभी चार विकेट गिरने बांकी थे, जिमि स्मिथ जैसा बल्लेबाज पीच पर था पर उनके सामने था सिराज का आत्मविश्वास, उसकी एकाग्रता और खेल के लिए उसका समर्पण। फिर सिराज की गेंदों ने मैदान पर जो कहानी लिखी वो भारतीय क्रिकेट के इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई।
सिराज ने दिखाया की आत्मविश्वास, एकाग्रता और संतुलित एग्रेशन के साथ हाथ से निकली दिख रही परिस्थियों को भी पलटा जा सकता है। उन्होंने ये भी सिखाया की बीते वक्त की गलतियों में उलझने की बजाय आने वाले वक्त को अपना बनाने की सोचो।
यदि सिराज बीते वक्त में उलझते तो आज विलेन होते और आने वाले वक्त का सोचा तो आज हीरो हैं।
(निचे सिराज द्वारा अपने फोन में लगाया गया वॉल पेपर है।)
