रेहान
Mudler :नाम, तमगा, शोहरत और रिकॉर्ड्स, कला की फील्ड में इन से बड़ा नशा कुछ और नहीं है। कला यानी कि आर्ट समाज को आर्टिस्ट नहीं देता है, बल्कि आर्टिस्ट समाज को आर्ट बनाकर, संवारकर, निखारकर देता है।हजारों साल पहले शायद पहली दफा किसी ने आवाज को थोड़ा अलग ढंग से निकाला होगा,तो किसी को समझ आया होगा,किसी की नहीं।पर फिर किसी सरफिरे ने उस सुर पर सालों मेहनत की होगी, रियाज किया होगा,और फिर जब उसने उस सुर को अपनी मेहनत के पतीले में पकाकर दुनिया को परोसा होगा तो वो चीज आर्ट बन गई होगी।कौनसी चीज आर्ट है, कौनसी चीज नहीं है, ये डिसाइड इस बात से होगा कि उस फील्ड में आर्टिस्ट कितने है।
आज कोई सोने से बुनी चादर पर अगर चांदी की स्याही से कुछ बना दे तो भी शायद उसमें उतना असर नहीं होगा, जितना असर व्यक्ति विंसेंट भाई की टेबल क्लॉथ पर बनाई पेंटिंग में सालो से कैद है। आने वाले सालों में अनगिनत फिल्में आएंगी, रिकॉर्ड बनेंगे टूटेंगे, पर जो काम के आसिफ ने मुगले आजम के शीश महल वाले सिक्वेंस में किया था, वो गिनती के लोग ही कर पाएंगें।क्योंकि आर्ट में आपको स्टेटमेंट देना होता है, कुछ स्टेटमेंट घमंड से भरे मालूम पड़ते है, कुछ स्टेटमेंट विनम्रता की मिसाल होते है, पर आर्टिस्ट के लिए स्टेटमेंट देना नाम और पैसे से ज्यादा जरूरी होता है, इतना जरूरी कि कइयों ने अपने अच्छे खासे करियर की भी फूंक दिया, सिर्फ एक स्टेटमेंट के चक्कर में।
आपने ये बात अक्सर कामयाब और मशहूर लोगों के मुंह से सुनी जरूर होगी कि “मेरे लिए तो नंबर्स और रिकॉर्ड्स मायने नहीं रखते।” यकीन मानिए सब के सब झूठ बोल रहे होते है, सब के सब झूठ बोलते है, या यूं कहे कि मजबूरन या रिवाजन,झूठ बोलने लगते है।वरना ये नशा सबको अपने दायरे में बिठा लेता है।बस फर्क ये होता है कि कुछ लोग मेहनत से कमाकर,ये नशा करते है, तो कुछ लोग घर का सामान ईमान बेचकर ये नशा करते है। कुछ लोग इस नशे के मजे तक महदूद रहते है, कुछ लोगों इस नशे को ही मोक्ष समझ बैठते है,किसी के अंदर ये नशा आईना बनकर रहता है, तो किसी के अंदर ये पर परछाई बनकर दुबका रहता है। पर थोड़ा बहुत,कम ज्यादा,नर्म गर्म,होता सबके अंदर है।
बताया जाता है कि लारा के 375 रन का रिकॉर्ड 9 साल तक रहा,फिर 2003 में मैथ्यू हेडन ने उसे तोड़ा, और फिर कुछ साल महीने बाद लारा ने वापस से 400 रन की पारी खेलकर रिकॉर्ड वापस से अपने नाम कर लिया। पर लारा का रिकॉर्ड हेडन से पहले मार्क टेलर तोड़ सकते थे, एक टेस्ट में दूसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद मार्क 334 रन पर खेल रहे थे, अपने हमवतन ब्रैडमैन का रिकॉर्ड तोड़ने से सिर्फ एक रन दूर,और लारा के पांच साल पुराने रिकॉर्ड से 42 रन दूर।तब मार्क टेलर ने भी ब्रैडमैन के सम्मान में एक रन बनाने से पहले इनिंग डिक्लेयर कर दी थी,जबकि तीन दिन का खेल बाकी था।
कुछ दिनों पहले सेम यही चीज Mudler ने की लारा के सम्मान में। अब इसका मतलब ये नहीं कि जो लोग रिकॉर्ड बनाने या तोड़ने के लिए जाते है वो बुरे है, या वो किसी का सम्मान करना नहीं जानते है,पर लोग बड़ी आसानी से भूल जाते है कि लारा के 375 से पहले हाईएस्ट किसका था, या उसके पहले किसका था। कल को कोई 5 सौ बना देगा तो लारा के 4 सौ बौने नजर आएंगे,पर कल को कोई हजार रन भी मार देगा तब भी मार्क टेलर और मुडलर इसी तरह याद रखे जाएंगे। क्योंकि जब कोई आर्टिस्ट आर्ट के नशे को किनारे करके कुछ करता है, कुछ बनाता है तो वो एक स्टेटमेंट देता है, और कला में नंबर्स फिंगर्स से ज्यादा स्टेटमेंट याद रखे जाते है,खासकर वो जो बोलकर नहीं, करके दिए जाए।
