Natheshwar Mahadev Temple : भगवान शिव का अनोखा मंदिर, जहां मन्नत के लिए भक्त लगाते हैं ताला

Siddarth Saurabh

Natheshwar Mahadev Temple : अमूनन मंदिरों में लोग भगवान को श्रद्धा भाव से फूल माला और मिठाई वगैरह चढ़ाते हैं. कई जगहों पर मान्यता के अनुसार लोग वस्त्र और घंटी वगैरह का भी चढ़ावा देते हैं. वहीं देश में एक ऐसा मंदिर है जहां पर आप लोगों के हाथोे में फूल माला या प्रसाद नहीं बल्कि ताला देखेंगे. ऐसा मंदिर है जहां पर लोग ताले लगाकर मन्नत मांगते हैं. हम बात कर रहे हैं यहां के नाथेश्वर महादेव मंदिर की. इसे लोग ताले वाले महादेव के भी नाम से जानते हैं.

प्रयागराज की पावन धरती पर अनेक प्राचीन और चमत्कारी मंदिर स्थित हैं, लेकिन इन सबमें नाथेश्वर महादेव मंदिर अपनी एक अनोखी परंपरा और मान्यता के कारण भक्तों के बीच विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है. यह मंदिर न सिर्फ शिवभक्तों के लिए धार्मिक स्थल है, बल्कि आस्था, श्रद्धा और विश्वास की अद्भुत मिसाल भी पेश करता है. इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां श्रद्धालु ताला लगाकर मन्नत मांगते हैं.

नाथेश्वर महादेव मंदिर का महत्व
आमतौर पर मंदिरों में भक्त फूल, फल, मिठाई या जल चढ़ाकर अपनी मन्नत मांगते हैं, लेकिन नाथेश्वर महादेव मंदिर में यह नजारा बिल्कुल जुदा है. यहां भक्त मंदिर परिसर में, शिवलिंग के आसपास या दीवारों पर विभिन्न आकार के ताले लगाते हैं. ऐसी मान्यता है कि जब तक यह ताला लगा रहता है, भक्त की मुराद भगवान शिव के पास सुरक्षित रहती है और उसके पूर्ण होने की संभावना बढ़ जाती है. मन्नत पूरी होने के बाद भक्त वापस आते हैं और श्रद्धापूर्वक उस ताले को खोलकर या नया ताला लगाकर भगवान का धन्यवाद करते हैं.

ताले की परंपरा और आस्था का संगम

स्थानीय लोगों और मंदिर से जुड़े पुजारियों के अनुसार, यह सदियों पुरानी प्रथा है. यह केवल एक अंधविश्वास नहीं, बल्कि भक्तों की अटूट आस्था और विश्वास का प्रतीक बन गया है. शादी की इच्छा रखने वाले युवक-युवतियां, नौकरी की तलाश में भटक रहे लोग, संतान प्राप्ति की कामना करने वाले दंपत्ति और यहां तक कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज भी अपनी-अपनी मन्नतें लेकर यहां आते हैं और ताला लगाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं.

सावन में लगता है श्रद्धालुओं का मेला

सावन का महीना भगवान शिव की उपासना का विशेष काल होता है और इस दौरान नाथेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है. कांवड़ लेकर आने वाले शिवभक्त यहां जलाभिषेक करते हैं और ताले लगाकर अपनी मनोकामनाएं भगवान को सौंपते हैं.

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