Navratri : शारदीय नवरात्रि 2025 में पांचवें दिन मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जा रही है. मां दुर्गा का यह स्वरूप ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं, जिन्होंने अपनी मुस्कान और ऊर्जा से सृष्टि की रचना की थी. मां कूष्मांडा की आराधना से जीवन में सुख-समृद्धि, आरोग्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है.
इस साल नवरात्रि 10 दिन की है. चतुर्थी तिथि में वृद्धि की वजह से इस साल मां के चौथे स्वरूप की पूजा 25 और 26 सितंबर दोनों दिन की जाएगी. इसलिए नवरात्रि के पांचवें दिन चौथी देवी मां कूष्मांडा की आराधना की जाएगी.
पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को शुद्ध करें.
- माता की प्रतिमा या चित्र को स्थापित कर गंगाजल से शुद्ध करें.
- कलश स्थापना करें और दीपक जलाएं.
- माता को लाल फूल, सिंदूर, चंदन, धूप और दीप अर्पित करें.
- भोग के रूप में मालपुए, मीठा प्रसाद और फल अर्पित करें.
- ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः मंत्र का 108 बार जाप करें.
- अंत में मां की आरती करें और परिवार की मंगलकामना करें.
मां कूष्मांडा मंत्र
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
इस मंत्र के जाप से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है.
भोग
मां कूष्मांडा को मालपुए और मीठा भोग विशेष प्रिय है. भक्त इसे बड़े श्रद्धा भाव से अर्पित करते हैं.
मां कूष्मांडा की आरती
कूष्मांडा जय जग सुखदानी। मुझ पर दया करो महारानी॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली। शाकंबरी माँ भोली भाली॥लाखों नाम निराले तेरे । भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा। स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदंबे। सुख पहुँचती हो माँ अंबे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा। पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
माँ के मन में ममता भारी। क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा। दूर करो माँ संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो। मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए। भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
महत्व
मां कूष्मांडा की पूजा करने से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है.
परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है.
साधक की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन के संकट दूर हो जाते हैं.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र के नियमों पर आधारित है. बिंदास बोल न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है.
