Nepal : नेपाल में सियासी संकट, केपी ओली ने लगाया षड्यंत्र का आरोप, बालेन शाह ने किया ऐलान

Bindash Bol

Nepal : हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद नेपाल में इस समय सियसी संकट गरा गया है. सोशल मीडिया पर बैन से भड़के आंदोलन ने ओली सरकार का तख्तापलट कर दिया है. नेपाल में जिस तरह के हालात बने हुए हैं उसे लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि देश की बागडोर किसके हाथ में होगी. इस आंदोलन में जिस नाम की चर्चा सबसे अधिक है वो है सुशीला कार्की. फिलहाल, आंदोलनकारियों के बीच सुशीला कार्की के नाम पर सहमति बनती हुई नहीं दिख रही है. लोग काठमांडू के मेयर बालेन शाह का नाम भी ले रहे हैं. नेपाल में तीसरे दिन भी हिंसा हुई, जेल तोड़कर भाग रहे क़ैदियों पर सेना ने की फायरिंग, जिसमें दो कैदियों की मौत हो गई है. नेपाल में जारी उथल-पुथल के बीच 15000 क़ैदी जेल से भाग गए हैं.

क्या नेपाल में युवाओं द्वारा किया गया Gen Z (जेड-जेन) आंदोलन सिर्फ सरकार के खिलाफ एक प्रदर्शन है, या फिर इसके पीछे कोई ‘बड़ा षड्यंत्र’ छिपा है? नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने युवाओं के नाम एक चौंकाने वाला खुला पत्र जारी किया है, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर भारत पर निशाना साधा है. अपने पत्र में ओली ने सीधे-सीधे आरोप लगाया है कि अगर उन्होंने भारत की बात मान ली होती, तो उनकी सरकार कई सालों तक चलती. उन्होंने दावा किया कि उन्हें इसलिए हटाया गया क्योंकि उन्होंने नेपाल का नया नक्शा संयुक्त राष्ट्र (UN) में भेजा था, जिसमें भारत के साथ सीमा विवाद वाले क्षेत्र लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को शामिल किया गया था. यह पत्र नेपाल की मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता और भारत-नेपाल संबंधों में एक नया मोड़ ला सकता है.

ओली ने ‘Gen Z’ से अपील करते हुए कहा कि वे इस आंदोलन की आड़ में रचे जा रहे ‘सत्ता और व्यवस्था परिवर्तन के षड्यंत्र’ को समझें. उन्होंने युवाओं को चेतावनी दी कि उनकी मासूमियत का फायदा उठाया जा रहा है और संविधान को खत्म करने की एक बड़ी साजिश चल रही है. ओली ने बताया कि उन्हें जेल में जिस तरह की यातनाएं दी गईं, उसका नतीजा ये हुआ कि वे कभी पिता नहीं बन पाए. उन्होंने कहा कि, ‘मैं हमेशा शांति के पक्ष में रहा हूं, क्योंकि मैंने व्यक्तिगत रूप से हिंसा की क्रूरता को सहा है.’ गृह मंत्री रहते हुए भी, उन्होंने राज्य की हिंसा का विरोध किया और अहिंसा का पक्ष लिया. यह दिखाता है कि शांति के प्रति उनका दृष्टिकोण केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित है. पूर्व प्रधानमंत्री ने पत्र के अंत में अपनी ‘जिद्दी’ प्रवृत्ति का भी जिक्र किया और कहा कि इसी स्वभाव ने उन्हें राजनीतिक संघर्षों से लड़ने और नेपाल की संप्रभुता की रक्षा करने में मदद की है. उन्होंने कहा कि उनका मकसद हमेशा नेपाल की राजनीतिक व्यवस्था को बचाना रहा है, न कि सत्ता में बने रहना.

काठमांडू के मेयर बालेन शाह का Gen-Z के नाम संदेश

इस बीच काठमांडू के मेयर बालेन शाह ने नेपाल के मौजूदा हालात पर एक महत्वपूर्ण ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने विशेष रूप से ‘Gen-Z’ और सभी नेपाली नागरिकों से धैर्य रखने की अपील की है. उन्होंने कहा कि देश एक अभूतपूर्व स्थिति से गुजर रहा है, लेकिन यही समय है जब वे एक ‘सुनहरे भविष्य’ की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. बालेन शाह ने ट्वीट में सुझाव दिया कि मौजूदा संकट को सुलझाने के लिए एक अंतरिम सरकार का गठन किया जाना चाहिए, जिसका एकमात्र काम देश में नए चुनाव कराना हो. उन्होंने कहा कि यह अंतरिम सरकार देश को एक नया जनादेश देगी.

मेयर बालेन शाह ने Gen-Z के इस प्रस्ताव का पूरा समर्थन किया कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को इस अंतरिम (चुनावी) सरकार का नेतृत्व करना चाहिए. उन्होंने Gen-Z की समझ, ज्ञान और एकता की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह उनकी परिपक्वता को दर्शाता है. उन युवा नेताओं के लिए जो अभी नेतृत्व संभालने की जल्दी में हैं, बालेन शाह ने कहा कि देश को उनकी ऊर्जा, सोच और ईमानदारी की स्थायी रूप से जरूरत है, न कि अस्थायी रूप से. उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे चुनावों का इंतजार करें और जल्दबाजी न करें. मेयर बालेन शाह ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि Gen-Z (जेड-जेन) द्वारा लाई गई ‘ऐतिहासिक क्रांति’ की रक्षा के लिए बिना किसी देरी के अंतरिम सरकार का गठन किया जाए और संसद को भंग किया जाए. उनका मानना है कि यही रास्ता देश को मौजूदा राजनीतिक उथल-पुथल से बाहर निकाल सकता है.

नेपाल में पिछले 2 दिनों से जारी सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के दौरान 3 पुलिसकर्मी सहित कम से कम 32 लोग मारे गए है. पुलिस और अधिकारियों ने बुधवार को इस बारे में जानकारी दी है. पुलिस और अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को संसद भवन के सामने प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 19 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर युवा थे. नेपाल पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि हिंसक प्रदर्शनों के दौरान मंगलवार को काठमांडू के कोटेश्वर इलाके में भीड़ ने 3 पुलिसकर्मियों को मार डाला. पुलिस ने बताया कि मंगलवार को कालीमाटी थाने पर पुलिस के साथ झड़प में 3 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई. स्वास्थ्य एवं जनसंख्या मंत्रालय के अनुसार प्रदर्शनों के दौरान 1000 से अघिक लोग घायल हुए है.

नेपाल में क्यों शुरू हुआ प्रदर्शन?

बता दें कि, नेपाल में हालिया प्रदर्शन मुख्य रूप से सरकार द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, और एक्स) पर प्रतिबंध लगाने के फैसले के विरोध में शुरू हुए थे. यह प्रतिबंध सरकार ने इसलिए लगाया था क्योंकि इन प्लेटफॉर्म्स ने नेपाल सरकार के साथ पंजीकरण की समय सीमा का पालन नहीं किया था. सरकार का तर्क था कि यह कदम अनियंत्रित कंटेंट, फर्जी खबरों और अवैध गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए जरूरी था. Gen-Z ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना. उनका आरोप था कि सरकार भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है. इसके बाद प्रदर्शन काठमांडू से शुरू होकर देश के अन्य शहरों में फैल गया, और इसने हिंसक रूप ले लिया.

Share This Article
Leave a Comment