Obesity : भारत के आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) में पहली बार मोटापे (Obesity) को एक गंभीर आर्थिक और स्वास्थ्य चुनौती के रूप में स्वीकार किया गया है। यह संकेत है कि अब मोटापा केवल एक व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्र की प्रगति में एक बड़ी बाधा बन चुका है।
1. भारत में मोटापे की वर्तमान स्थिति और रफ़्तार
भारत में मोटापे की रफ़्तार चिंताजनक है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आंकड़ों और आर्थिक सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, भारत एक ‘दोहरी मार’ (Double Burden of Malnutrition) झेल रहा है—जहाँ एक तरफ कुपोषण है, वहीं दूसरी तरफ मोटापा तेजी से पैर पसार रहा है।
आंकड़ों का खेल: भारत में लगभग 24% महिलाएं और 23% पुरुष अब मोटापे या अधिक वजन की श्रेणी में आते हैं। NFHS-4 (2015-16) की तुलना में इसमें लगभग 4-5% की वृद्धि देखी गई है।
शहरी बनाम ग्रामीण: हालांकि मोटापा शहरों में अधिक है (लगभग 30% के करीब), लेकिन ग्रामीण इलाकों में इसकी बढ़ने की दर अब शहरी क्षेत्रों को टक्कर दे रही है।
बच्चों में स्थिति: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में बच्चों में मोटापे की दर दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली दरों में से एक है।
2. मोटापा बढ़ने के प्रमुख कारण
आर्थिक सर्वे ने उन सामाजिक और आर्थिक बदलावों पर रोशनी डाली है जिन्होंने हमारी जीवनशैली को पूरी तरह बदल दिया है..
अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ (Ultra-Processed Foods)
बाजार में चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स, बिस्कुट और ‘रेडी-टू-ईट’ भोजन की उपलब्धता और इनके आक्रामक विज्ञापन ने पारंपरिक आहार की जगह ले ली है। इनमें उच्च मात्रा में चीनी, नमक और ‘बुरे’ फैट (Trans-fats) होते हैं।
गतिहीन जीवनशैली (Sedentary Lifestyle)
तकनीकी प्रगति ने शारीरिक श्रम को न्यूनतम कर दिया है। ऑफिस में घंटों बैठकर काम करना, मनोरंजन के लिए स्क्रीन (मोबाइल/टीवी) पर निर्भरता और परिवहन के साधनों के अत्यधिक उपयोग से कैलोरी बर्न नहीं हो पाती।
नींद की कमी और मानसिक तनाव
आधुनिक जीवन की भागदौड़ और प्रतिस्पर्धा ने तनाव (Stress) को जन्म दिया है। कोर्टिसोल हार्मोन का बढ़ता स्तर और नींद की कमी मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती है, जिससे शरीर में चर्बी जमा होने लगती है।
आर्थिक संपन्नता और आहार का बदलाव
जैसे-जैसे लोगों की आय बढ़ रही है, लोग फल और सब्जियों के बजाय कैलोरी-युक्त ‘लक्जरी फूड’ और बाहर के खाने (Dine-out) को प्राथमिकता दे रहे हैं।
3. मोटापे के घातक दुष्परिणाम
मोटापा केवल शरीर का आकार नहीं बदलता, बल्कि यह बीमारियों का प्रवेश द्वार है…..
गैर-संचारी रोग (NCDs): मोटापा टाइप-2 डायबिटीज, उच्च रक्तचाप (Hypertension), और हृदय रोगों का सबसे बड़ा कारण है। भारत को पहले ही ‘दुनिया की डायबिटीज राजधानी’ कहा जाने लगा है।
कैंसर का जोखिम: शोध बताते हैं कि अधिक वजन होने से लिवर, किडनी और स्तन कैंसर जैसे कई प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
मानसिक स्वास्थ्य: मोटापे से ग्रस्त लोग अक्सर कम आत्मविश्वास, अवसाद (Depression) और सामाजिक अलगाव का सामना करते हैं।
प्रजनन क्षमता पर प्रभाव: महिलाओं में PCOS और पुरुषों में हार्मोनल असंतुलन के कारण बांझपन की समस्या बढ़ रही है।
