Operation Sindoor : अभियान सिंदूर

Bindash Bol

डॉ प्रशान्त करण
(आईपीएस) रांची

Operation Sindoor : विगत दिनों अपने गौरवशाली राष्ट्र भारत द्वारा पड़ोसी शत्रु राष्ट्र पाकिस्तान पर छद्म युद्ध निरंतर करते रहने के कारण और पहलगाम में पकिस्तान सैन्य द्वारा प्रायोजित दुर्दांत हिंसक घटना के प्रतिशोध में आतंकवादी ठिकानों के मुख्यालयों और सटीक और चिन्हित स्थानों पर घातक बमबाजी की गयी . इससे उसकी कमर टूट गयी और नाभिकीय शास्त्रों से युद्ध करने की क्षमता भी जाती रही . कुलमिलाकर पकिस्तान तेईस मिनट के इस आक्रमण से इतना धराशायी हुआ कि आजतक पूरे विश्व में फूटफूट कर रोते हुए घूम रहा है . उसके आँसू थमने का नाम नहीं ले रहे . रवि बाबू को अभियान सिंदूर इतना प्रभावित कर गया कि अगले ही प्रातःकाल से नमस्ते कहना छोड़कर सीधे जयहिंद कहने पर उतर आए . कोई मिलता , नमस्ते करता तो उत्तर में रवि बाबू तड़ाक से सावधान की मुद्रा में आ जाते और उच्च स्वर में जयहिंद कह देते . अगल – बगल अथवा रास्ते पर लोग भौंचक हो जाते , लेकिन रवि बाबू उसी अपने चिर परिचित मुस्कान बिखेरते हुए मस्ती में आगे बढ़ जाते . किसी को संवाद भेजते तो अंत में जय हिन्द लिखना ही नहीं भूलते . अधिकतर राष्ट्रभक्त रवि बाबू में राष्ट्रभक्ति प्रगाढ़ , मुखर और वाचाल होते देख प्रसन्न हुए . कहने लगे कि चुपचाप के देशभक्तों के लिए रवि बाबू प्रेरणाश्रोत बन गए हैं . अब कुछ दिनों में भारतीय स्टेट बैंक में ग्राहकों के अभिवादन में जय हिन्द कहना अनिवार्य कराकर ही रवि बाबू दम लेने वाले हैं . उनके कुछ प्रशंसकों का यहाँ तक कहना है कि अपने सम्प्रति प्रवास स्थल हैदराबाद में रवि बाबू क्रांति लाकर ही रहेंगे . विश्वास है कि सांसद हैदराबाद के बड़काउ भाईजान , जो कहा करते थे कि मेरी गर्दन पर छूरी रख दो फिर भी भारत माता की जय नहीं कहूँगा , राष्ट्रीय गान नहीं गाऊँगा भी रवि बाबू की देखादेखी जय हिन्द करने लगें . अगर ऐसा हुआ तो हैदराबाद में राष्ट्रभक्ति की गंगा को बहाकर भागीरथी पद को प्राप्त कर लें . रवि बाबू को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए . वे दूर देखते हैं , लम्बी सोचते हैं . अवश्य ही उनमें राजनीति महत्वाकांक्षा जग गयी है . इसी अन्य ने कहा – रवि बाबू वैसे तो सरल , मृदुभाषी , संवेदनशील दीखते और लगते हैं . राजनीति से दूर रहते हैं . ऐसा नहीं हो सकता . आपलोग बात का बतंगड़ बना रहे हैं . उनकी देशभक्ति अभियान सिंदूर से प्रभावित होकर मुखर हुई , यह स्वाभाविक है . अब धीरे – धीरे चौक , गलियों , मुहल्लों में लोग सहमत होने लगे कि रवि बाबू एकदम सज्जन व्यक्ति हैं , दिल – दिमाग से मस्ती में रहने वाले पक्के बनारसी हैं , हैदराबाद में आकर बच्चों के कारण बस गए हैं . यह सब जान – समझकर अब तक चुप रामलाल गंभीर हो गए और खिसक लिए . उनके अचानक जाते ही खुसुरपुसुर होने लगी .
अगले दिन पता चला कि रामलाल बकबकाकर घूम रहे हैं . कहने लगे – मामला मेरा निजी है और रवि बाबू उसे सार्जनिक बनाने पर तुले हैं . हाँ , मेरी स्थिति पड़ोसी शत्रुराष्ट्र पाकिस्तान की कर दी गयी . एकांत में उन्होंने मथुरा जी को नशे में सब बक दिया . रामलाल की दृष्टि में पहलवान चंदूराम की कन्या भा गयी थी और पहलवान साहब घनघोर राष्ट्रवादी थे . अभियान सिंदूर समाप्त होते ही अभियान सिंदूर की प्रशंसा में रामलाल ने कोई कोर -कसर न छोड़ी . उन्होंने ध्यान रखा कि घंटे भर में बात पहलवान जी तक पँहुचे . शाम को वे स्वयं पहलवान जी के पास पँहुच गए और राष्ट्रभक्ति की पूरी शब्दावली उगल दी ताकि पहलवान जी प्रभावित हों . वे हुए भी . अगले दिन रामलाल ने पहलवान जी से उनकी कन्या से विवाह का प्रस्ताव दे डाला . उनका यह अभियान सिंदूर पहलवान जी को इतना चुभ गया कि उन्होंने कहा – तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ? लुच्चा कहीं का . फिर क्या था , पहलवान जी अपने मुगदर ले कर पिल पड़े और रामलाल की मन भर कुटाई कर दी . बात रवि बाबू तक पँहुची . अगले दिन से ही रवि बाबू जय हिन्द पर उतर आए . अब रामलाल जी का रवि बाबू से सैद्धांतिक मतभेद चल रहा है , कारण वही – उनका अभियान सिंदूर !

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