मनातू के जंगल से निकला नाला बना मौत का रास्ता,कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
जलेश कुमार
Palamu : मनातू के जंगल से निकलकर घनी आबादी वाले मैदानी इलाकों में उतरने वाला यह नाला आज कसमार पसहर पारपइन कसियाडीह के लिए अभिशाप बन गया है। इस वर्ष अत्यधिक बारिश में तेज़ बहाव के साथ यह नाला जंगल से निकलकर मैदानी क्षेत्र में पहुंचते ही तबाही मचाना शुरू किया।पसहर बाजार के पास बने कई तालाबों को तोड़ता हुआ, उपजाऊ खेतों को निगलता हुआ और तटबंधों को काटता हुआ कसियाडीह पहुंचने पर किनारे बने तटबंध को तोड़ता हुआ पीसीसी सड़क तक पहुंच गया और सड़क के नीचे कई फीट तक मिट्टी को कटाव कर चुका है, जिससे पूरी सड़क अब हवा में झूल रही है। हालात यह है कि कई तालाब टूटे, उपजाऊ खेत बहे, अब सड़कें भी सुरक्षित नही है। बाहर से सड़क सामान्य दिखती है, लेकिन अंदर से वह पूरी तरह खोखली हो चुकी है।ग्रामीण सड़क के नीचे लकड़ी के खंभों के सहारे सड़क को टिकाए और उसपर आवाजाही कर रहे है जहां हर कदम पर जान का खतरा है।
यह नाला आगे जाकर अमानत नदी में समा जाता है, लेकिन उसके पहले यह गांवों के लिए विनाश छोड़ जाता है। खेत, रास्ते, तटबंध और अब संपर्क सड़क—सब इसकी चपेट में आ चुके हैं। ग्रामीणों विक्रमादित्य सिंह,प्रदीप सिंह,नकुल सिंह,गुड्डू सिंह समेत कई लोगों ने कहा कि हर साल कटाव बढ़ता जा रहा है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।
प्रशासनिक चुप्पी और जनप्रतिनिधियों की बेरुखी
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इतनी भयावह स्थिति के बावजूद न तो किसी सरकारी एजेंसी ने अब तक ठोस कार्रवाई की है और न ही किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि ने मौके पर पहुंचकर समस्या का आकलन किया है। ग्रामीण कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन नतीजा सिर्फ आश्वासन तक सीमित है।
यह सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं
यह दृश्य केवल एक उदाहरण है। पलामू जिले में ऐसे दर्जनों इलाके हैं, जहां आज भी लोग जान जोखिम में डालकर लीग-पगडंडियों से, नदी-नालों को पार कर आवागमन करने को मजबूर हैं। विकास के दावों के बीच ग्रामीण इलाकों की यह सच्चाई सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
सवाल जो जवाब मांगते हैं
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
क्या सड़क धंसने के बाद ही जागेगा सिस्टम?
क्या ग्रामीणों की जान की कीमत इतनी सस्ती है?
पलामू में खंभों पर टिकी यह सड़क केवल एक रास्ता नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का जीता-जागता प्रमाण है।
