5 नए चेहरे, कांग्रेस को झटका… झारखंड में कैसी होगी हेमंत सोरेन की नई सरकार?

Ujjwal Kumar Sinha

उज्जवल कुमार सिन्हा

रांची : झारखंड में मैदान फतह के बाद अब हेमंत सोरेन सरकार गठन की कवायद में जुट गए हैं. हेमंत की पिछली सरकार की तुलना में इस बार नई सरकार बदली-बदली नजर आएगी. इसकी 2 बड़ी वजहें हैं. पहली वजह सरकार के चार मंत्रियों का चुनाव हारना और दूसरी वजह गठबंधन में नए दल की एंट्री है.

81 विधानसभा सीटों वाली झारखंड में मुख्यमंत्री समेत 12 मंत्री बनाए जा सकते हैं. पिछली बार मुख्यमंत्री और 6 मंत्री पद जेएमएम को, 4 मंत्री पद कांग्रेस को और एक मंत्री पद आरजेडी को मिला था. मतलब साफ है कि 5 नए चेहरे, कांग्रेस को झटका… झारखंड में कैसी होगी हेमंत सोरेन की नई सरकार? इस बात पर चर्चा निकल पड़ी है.

कैबिनेट के कोटे में बदलाव संभव
झारखंड में पिछली बार 4 विधायकों पर एक मंत्री पद रखा गया था. इस फॉर्मूले की वजह से कांग्रेस को 4 और जेएमएम को 7 पद मिले थे. आरजेडी को एक मंत्री पद दिया गया था. इस बार सीटों की संख्या में बदलाव हुआ है. कहा जा रहा है कि इस बार एक मंत्री पद के लिए करीब 5 विधायकों का समर्थन चाहिए.

इस लिहाज से कांग्रेस के कोटे में मंत्री पद की संख्या घट सकती है. कांग्रेस के पास 16 विधायक हैं. जेएमएम ने 34 सीटों पर जीत हासिल की है. एक चर्चा यह भी है कि माले को एडजस्ट करने के लिए जेएमएम कांग्रेस को डिप्टी स्पीकर का पद दे सकती है. पिछली बार यह पद रिक्त ही रह गया था.

हालांकि, कहा जा रहा है कि माले अगर कैबिनेट में शामिल नहीं होती है तो कांग्रेस को पूरे 4 पद पिछली बार की तरह ही मिल सकता है.

नए चेहरे होंगे शामिल होंगे
हेमंत सोरेन सरकार के चार मंत्री मिथिलेश ठाकुर, बैद्यनाथ राम, बेबी देवी और बन्ना गुप्ता चुनाव हार गए हैं. मिथिलेश, बैद्यनाथ और बेबी देवी जेएमएम कोटे से मंत्री बने थे, तो बन्ना कांग्रेस कोटे से.

वहीं आरजेडी कोटे से मंत्री रहे सत्यानंद भोगता इस बार चुनाव से ही दूर रहे. ऐसे में कहा जा रहा है कि आरजेडी कोटे से किसी नए चेहरे को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है. आरजेडी सिंबल पर दो यादव, एक दलित और एक सवर्ण चेहरा जीतकर इस बार सदन पहुंचे हैं.

जेएमएम कोटे से जिन मंत्रियों की हार हुई है, उनकी जगह उन्हीं के बिरादरी के किसी नेता को जगह मिलने की बात कही जा रही है. मसलन कुड़मी समुदाय से आने वाली बेबी देवी की हार हो गई है. उनकी जगह इसी समुदाय के किसी नेता को मंत्री बनाया जा सकता है.

बैद्यनाथ राम दलित बिरादरी से आते हैं. राम की जगह दलित समुदाय के किसी विधायक के मंत्री बनाए जाने की चर्चा है. इसी तरह मिथिलेश ठाकुर की जगह किसी सवर्ण समुदाय के नेता को मंत्री बनाए जाने की चर्चा है.

कांग्रेस को डिप्टी सीएम नहीं मिलेगा

जीत से गदगद कांग्रेस झारखंड में डिप्टी सीएम का पद चाह रही थी, लेकिन हेमंत सोरेन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है. कहा जा रहा है कि डिप्टी सीएम की मांग कांग्रेस के नेता सुबोध कांत सहाय के जरिए पार्टी ने की थी, लेकिन हेमंत ने कहा कि जो व्यवस्था है, उसे ही रहने दीजिए.

यानी कांग्रेस कोटे से जो भी शामिल होंगे, वो सिर्फ कैबिनेट मंत्री के हैसियत से शामिल होंगे. इस बार यह भी देखना है कि वित्त, स्वास्थ्य, कृषि और ग्रामीण जैसे विभाग कांग्रेस को मिलते हैं या नहीं?

महिला और युवा चेहरे को हेमंत सोरेन की पिछली सरकार में सिर्फ 2 महिला मंत्री थीं. कहा जा रहा है कि इस बार इसमें बढ़ोतरी हो सकती है. महागठबंधन की तरफ से 8 महिला विधायक चुनी गई हैं. सरकार में युवाओं को भी इस बार तरजीह मिलने की बात कही जा रही है.

2019 में जब हेमंत कैबिनेट का गठन हुआ था, तो सिर्फ बादल पत्रलेख युवा मंत्री थे. कहा जा रहा है कि इस संख्या में इस बार बढ़ोतरी होगी.

क्षेत्रीय समीकरण साधने पर भी जोर

हेमंत सोरेन की पिछली सरकार में कोल्हान से 3 मंत्री थे. चंपई के इस्तीफा के बाद भी हेमंत ने इस फॉर्मूले को बरकरार रखा. कोल्हान में इस बार इंडिया गठबंधन की सीटें जरूर कम आई है, लेकिन दबदबा अभी भी कायम है. ऐसे में कहा जा रहा है कि हेमंत सोरेन सरकार में कोल्हान से फिर 3 मंत्री बनाए जा सकते हैं.

इसी तरह सरकार में संथाल से 3 और पलामू से एक मंत्री थे. दक्षिणी और उत्तरी छोटानागपुर से 4 मंत्री बनाए गए थे. इसे भी बरकरार रखने की बात कही जा रही है.

हेमंत कैबिनेट में कांग्रेस ने एक अल्पसंख्यक, एक आदिवासी, एक सवर्ण और एक ओबीसी को मंत्री बनाया था. हेमंत की पार्टी ने 3 आदिवासी, एक दलित, एक सवर्ण और एक ओबीसी को कैबिनेट में जगह दी थी. आरजेडी कोटे से एक दलित को कैबिनेट में जगह मिली थी.

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