उमानाथ लाल दास
PK : भाजपा समेत देश की तमाम बड़ी पार्टियों के चुनावी रणनीतिकार रह चुके प्रशांत किशोर पांडेय इस बार बिहार बदलने निकले हैं। उनके पास अनुभव व कौशल की जो पूंजी है वह सरकार बदलने या बनाने की है, व्यवस्था बदलने की नहीं। कहां सत्ता परिवर्तन या सरकार बरकरार रखकर सामाजिक-आर्थिक जीवन में क्रांति ला दी। अब तक उन्होंने जिसके लिए भी काम किया, उनका सालों साल के दम पर खड़ा जनाधार था। इस लड़ाई में वह धीरे-धीरे सबसे दो-दो हाथ करने लगे हैं। व्यापक बदलाव की कोई भी लड़ाई सहयोग और वातावरण की अपेक्षा करती है। और पीके पांडेय। हैं कि एक-एक कर सबसे भिड़े जा रहे हैं। लेकिन वह जो चाह रहे हैं कि लोग दिल्ली की “आप” की तरह उनको चुन लेंगे तो ऐसा नहीं होने वाला। गांधी की लड़ाई हो या राम-कृष्ण की। हर पक्ष में कुछ कमजोर और कुछ चरित्रवान लोग होते हैं। और यह उन्हें भी आजमाना चाहिए। सांगठनिक आधार के लिए, यह होमवर्क नहीं किये तो मुश्किल होगी। डीजीपी और भोजपुरी अभिनेता के पार्टी में शामिल होने भर से जनाधार नहीं बन/बढ़ जाएगा ,,, सिर्फ रणनीति से नहीं चलेगा, राजनीति भी करनी होगी ,,, और राजनीति चल, बल, कल मांगती है
