रवि अग्रहरि
Rahul Gandhi : देश में इन दिनों इलेक्शन कमीशन के प्रक्रिया पर कांग्रेस लीडर राहुल गांधी के तमाम प्रश्न उठाए जाने के बाद बवाल मचा है। चारों तरफ चर्चाओं का बाजार गर्म है। खास करके बिहार में भी, क्योंकि वहां इसी साल इलेक्शन है। राहुल गांधी का कहना है कि भाजपा इलेक्शन कमीशन के साथ मिलकर वोट चोरी का धंधा कर रही है। इसी वजह से उनकी सरकार है। अगर नरेंद्र मोदी वोट चोरी नहीं किए होते तो आज प्रधानमंत्री नहीं होते।
युवराज संविधान लेकर घूम रहे हैं और वोट चोरी, चुनाव चोरी का झूठा आरोप लगाकर एक संवैधानिक संस्था को बदनाम करने में लगे हैं और झूठ के बल पर अराजकता फैलाने की साजिश रची जा रही है। यही कांग्रेस है जो चुनाव आयुक्तों को सीधे राज्यपाल, मंत्री, या राज्यसभा भेजती रही या पद्म विभूषण से सुशोभित करती रही, क्योंकि तब चुनाव आयोग को कांग्रेस अपनी जागीर समझती थी। आज निष्पक्ष चुनाव हो रहे तो धमकी पर उतर आई है।
मेरा मानना है कि देश में पहला चुनाव चोरी तब हुआ जब पटेल को 14 और नेहरू को 1 वोट मिले लेकिन महात्मा गांधी पर दबाव डालकर प्रधानमंत्री बने नेहरू।
भारत का दूसरा बड़ा चुनावी भ्रष्टाचार तो तब हुआ जब डॉ. आंबेडकर को हराने के लिए कांग्रेस और सीपीआई ने मिलकर खेल किया था और आज संविधान और अम्बेडकर की दुहाई देती है।
इसी कांग्रेस ने अम्बेडकर को हराने की गोटी बिछाई और मुंबई उत्तर लोकसभा सीट पर 74,333 वोट ख़ारिज कर दिए गए थे। अम्बेडकर संविधान रचयिता होकर भी चुनाव हार गए थे और हारजीत का अंतर 14,561 वोटों का था।
इसके खिलाफ डॉ आंबेडकर ने 21 अप्रैल, 1952 को केंद्रीय चुनाव आयोग में 18 पेज की याचिका दायर की थी। सब रिकॉर्ड में है। बहुतेरे कांड हैं कांग्रेस के देखते जाइए। वह बचपन में लेई बनाकर रात में पोस्टर चिपकाने का झूठ बोलेंगे और आप सरकारी विमान में भाई-बहन के जन्मदिन की तस्वीर फेंक कर मारना क्योंकि सच का प्रमाण होता है लेकिन झूठ अनाथ होता है।
