Raksha Bandhan : इतिहास के आईने में रक्षाबंधन

Bindash Bol

Raksha Bandhan : राखी (रक्षाबंधन) का त्योहार भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के बंधन का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं। यह त्योहार न केवल एक पारंपरिक प्रथा है, बल्कि इसके पीछे कई ऐतिहासिक और पौराणिक कथाएं भी जुड़ी हैं, जो इसे और भी खास बनाती हैं।

रानी कर्णावती और हुमायूं

चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजी थी और उनसे मदद मांगी थी, जब उनके राज्य पर बहादुर शाह ने आक्रमण किया था। हुमायूं ने अपनी बहन की राखी की लाज रखते हुए अपनी सेना भेजी और रानी की रक्षा की।

सिकंदर और राजा पोरस

सिकंदर की पत्नी रोक्साना ने राजा पोरस को राखी बांधकर उनसे अपने पति को युद्ध में न मारने का वचन लिया था।

भगवान कृष्ण और द्रौपदी

महाभारत में, जब भगवान कृष्ण की उंगली से खून बह रहा था, तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांधा था। कृष्ण ने द्रौपदी को वचन दिया था कि वे हमेशा उसकी रक्षा करेंगे।

देवी लक्ष्मी और राजा बलि

भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी थी। जब विष्णु ने दो पग में पृथ्वी और आकाश नाप लिए, तो बलि ने अपना सिर झुका दिया। विष्णु ने प्रसन्न होकर बलि से वरदान मांगने को कहा, तो बलि ने विष्णु को अपने साथ रहने का वचन ले लिया। देवी लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बांधकर उनसे विष्णु को वापस लौटाने का वचन लिया।

इंद्र और इंद्राणी

इंद्राणी ने देवराज इंद्र को राक्षसों के खिलाफ युद्ध में जीत दिलाने के लिए एक रक्षासूत्र बांधा था।

भगवान गणेश और संतोषी मां

जब भगवान गणेश की बहन मनसा ने उन्हें राखी बांधी, तो उनके पुत्र शुभ और लाभ ने भी राखी की इच्छा जताई। तब गणेश ने भगवान अग्नि से प्रार्थना की और संतोषी मां का जन्म हुआ।

ये कथाएं रक्षाबंधन के त्योहार को एक विशेष महत्व और गरिमा प्रदान करती हैं। यह त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम, समर्पण और रक्षा के बंधन का प्रतीक है।

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