S-400 MRO : भारत की एयर डिफेंस को और अधिक मजबूत बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है।
भारत में रूसी S-400 वायु रक्षा प्रणाली के लिए मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधाएं स्थापित करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यह पहल न केवल देश की आत्मनिर्भरता को बढ़ाएगी, बल्कि भारत की सुरक्षा को भी अभेद्य बनाएगी।
इन MRO केंद्रों की स्थापना से S-400 प्रणाली की मरम्मत और रखरखाव देश में ही संभव हो सकेगा, जिससे किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सेवा उपलब्ध होगी। इसके अलावा, 2028 तक इन केंद्रों में S-400 के स्पेयर पार्ट्स का निर्माण भी शुरू हो जाएगा, जिससे विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता कम होगी और भारतीय रक्षा तंत्र को नया बल मिलेगा।
वर्तमान में भारत ने रूस से पांच S-400 स्क्वाड्रनों का ऑर्डर दिया था, जिनमें से तीन की डिलीवरी हो चुकी है और बाकी दो स्क्वाड्रन अगले वर्ष के पूर्वार्द्ध में डिलिवर हो जायेंगे।
डिलीवरी पूरी होने के बाद भारत अगली पीढ़ी के S-500 प्रणालियों के ऑर्डर पर भी विचार कर सकता है। इससे देश का वायु सुरक्षा कवच और भी मजबूत होगा, खासकर चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की बढ़ती चुनौतियों के मद्देनज़र।
यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भारतीय रक्षा उद्योग को प्रोत्साहन देगा, नई नौकरियां पैदा करेगा और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ाएगा।
