- झारखंड में सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल
SalmanKhan : सलमान खान की आने वाली फिल्म “बैटल ऑफ गलवान” के टीज़र में “बिरसा मुंडा की जय” के नारे के इस्तेमाल के कारण झारखंड में भारी उत्साह है, क्योंकि यह नारा बिहार रेजिमेंट के जवानों का युद्ध घोष है, जिसमें बिहार और झारखंड के सैनिकों की बड़ी संख्या होती है, जिससे स्थानीय लोग गर्व महसूस कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर खूब शेयर कर रहे हैं। यह नारा 16 बिहार रेजिमेंट के सैनिकों द्वारा गलवान घाटी में इस्तेमाल किया गया था, और सलमान खान इस फिल्म में 16 बिहार रेजिमेंट के कर्नल का किरदार निभा रहे हैं, जिससे यह झारखंड वासियों के लिए एक भावनात्मक जुड़ाव का कारण बन गया है।
फिल्म का नाम: ‘बैटल ऑफ गलवान’।
नारे का महत्व: ‘बिरसा मुंडा की जय’ बिहार रेजिमेंट का एक पारंपरिक युद्ध घोष (वॉर क्राई) है, जो झारखंड और बिहार के जवानों के सम्मान और वीरता को दर्शाता है।
झारखंड से जुड़ाव: फिल्म में इस नारे के इस्तेमाल से झारखंड के लोग उत्साहित हैं और इसे अपनी पहचान और गौरव से जोड़कर देख रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल: टीज़र के रिलीज होते ही यह नारा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और युवाओं की स्टोरीज़ में छाया हुआ है।
फिल्म की कहानी: फिल्म 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सेना के बीच हुई झड़प पर आधारित है, जिसमें सलमान खान कर्नल बी. संतोष बाबू का किरदार निभा रहे हैं।
हुआ यू की सलमान खान की आने वाली फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ का टीज़र शनिवार को रिलीज होते ही चर्चा में आ गया है।
टीज़र में सलमान खान का डायलॉग —
“जख्म लगे तो मेडल समझना… और कहना – बिरसा मुंडा की जय!” तेजी से झारखंड समेत देशभर में वायरल हो रहा है।
टीज़र जारी होते ही इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सएप पर लोग सलमान के इस डायलॉग को काटकर स्टेटस और स्टोरी में लगा रहे हैं। खास तौर पर झारखंड के युवाओं में इसे लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
खास बात यह है कि अब तक बिरसा मुंडा पर कई शॉर्ट फिल्में और डॉक्यूमेंट्री बन चुकी हैं, लेकिन किसी बड़ी स्टारकास्ट वाली मेनस्ट्रीम बॉलीवुड फिल्म में पहली बार “बिरसा मुंडा की जय” का नारा शामिल हुआ है।
आदिवासी स्वाभिमान से जुड़ा मुद्दा
फिल्म के इस डायलॉग को आदिवासी समाज और झारखंड की पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर लोग इसे धरती आबा को सम्मान और गौरव बता रहे हैं।
यूज़र्स का कहना है कि “ये सिर्फ एक फिल्मी सीन नहीं, बल्कि आदिवासी इतिहास को मुख्यधारा में लाने की शुरुआत है।”
