Saraswati Mantra :बसंत पंचमी को बसंत ऋतु के शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन ज्ञान की देवी माता सरस्वती की पूजा की जाती है। ऋग्वेद में भगवती सरस्वती की महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया है-प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु।
अर्थात माँ सरस्वती परम चेतना हैं। ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं। हममें जो आचार और मेधा है उसका आधार भगवती सरस्वती ही हैं। वैसे तो माता सरस्वती को समर्पित कई मंत्र हैं, जिनका जाप हमारे जीवन में माता की कृपा और ज्ञान का प्रकाश लेकर आता है लेकिन उन सबमें सरस्वती गायत्री मंत्र बेहद ख़ास है। इसका जप करने से विद्या, वाणी, स्मरण शक्ति और विवेक की वृद्धि होती है। यह विद्यार्थियों, कलाकारों और ज्ञान की खोज करने वालों के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। लेकिन सरस्वती गायत्री मंत्र के बारे में जानने से पहले ये जानते हैं कि सरस्वती पूजा कब है…
पंचांग के अनुसार, पंचमी तिथि 23 जनवरी 2026 को रात 2:29 बजे (22 जनवरी की अर्धरात्रि के बाद) प्रारम्भ होगी। पंचमी तिथि की समाप्ति 24 जनवरी 2026 को रात 1:46 बजे (अर्धरात्रि से पहले) को होगी। ऐसे में उदया तिथि को आधार मानते हुए बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी 2026 को ही मनाया जाएगा। बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त रहता है, यानि कोई मुहूर्त शुभ या अशुभ नहीं माना जाता है। इसलिए, आप कभी भी माँ सरस्वती की पूजा कर सकते हैं।
क्या है सरस्वती गायत्री मंत्र?
॥ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि।
तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
इसका अर्थ है कि हे माँ सरस्वती! आप वाणी की अधिष्ठात्री देवी हैं। हे समस्त कामनाओं की स्वामिनी, हम आपका ध्यान करते हैं तथा सद्बुद्धि की प्राप्ति हेतु प्रार्थना करते हैं। हे देवी! हमारी बुद्धि को विद्या रूपी प्रकाश से प्रकाशित करें।
सरस्वती गायत्री मंत्र का महत्वइस मंत्र का जाप बुद्धि, स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ाता है। यह विद्यार्थियों के स्मरण शक्ति, एकाग्रता और सफलता में वृद्धि के लिए अत्यंत लाभकारी है। कलाकारों के लिए यह मंत्र रचनात्मकता, संगीत और कला में निपुणता लेकर आता है। इस मंत्र की खासियत है कि यह वाणी दोष, हकलाहट और मानसिक भ्रम को दूर करने में बेहद सहायक है। लेखकों और वक्ताओं को यह मंत्र ज्ञान, संगीत, कला और लेखन में प्रगति देता है। छात्रों को यह मंत्र परीक्षा, इंटरव्यू और रचनात्मक कार्यों में सफलता दिलाता है। केवल इतना ही नहीं, आध्यात्मिक साधना में इस मंत्र का जाप विवेक, स्पष्टता और आत्मज्ञान प्रदान करता है।
