Sawan : संतान प्राप्ति की कामना से राजा दशरथ ने की थी शिवलिंग की स्थापना

Bindash Bol
  • यहां दशरथ के श्राप से प्रकट हुआ था 13 मुखी शिवलिंग, जानें मान्यता

Sawan : गाजीपुर जिले के मरदह ब्लॉक में स्थित महाहर धाम पूर्वांचल के सबसे प्राचीन और आस्था से जुड़े शिव मंदिरों में से एक है. यह स्थल त्रेतायुग से जुड़ा हुआ है और श्रवण कुमार की करुण कथा घटित हुई थी. किंवदंती के अनुसार, अयोध्या के राजा दशरथ शिकार के लिए इस क्षेत्र में आए थे, तभी पास ही दृष्टिहीन माता-पिता को तीर्थ यात्रा पर ले जा रहे है.

श्रवण कुमार अपने माता-पिता के लिए पास के सरोवर (पोखरे) से जल भरने गए. राजा दशरथ ने झाड़ियों में हलचल सुनकर भ्रमवश शब्दभेदी बाण चला दिया. जिससे श्रवण कुमार की मृत्यु हो गई. उनके माता-पिता ने दुखी होकर दशरथ को पुत्र वियोग का श्राप दिया.स्थानीय लोगों और पुजारी के अनुसार, आजभी मंदिर परिसर का प्राचीन सरोवर वही माना जाता है. श्रवणडीह गांव श्रवण कुमार के नाम पर ही बसा है. बारिश और सावन के मौसम में यह सरोवर कमल के फूलों से ढक जाता है.

तेरह मुखी शिवलिंग और मंदिर परिसर की विशेषता

महाहर धाम का सबसे बड़ा आकर्षण है. इसका 13 मुखी शिवलिंग जो पूरे उत्तर भारत में अद्वितीय माना जाता है. श्राप मुक्ति और संतान प्राप्ति की कामना से राजा दशरथ ने ही शिवलिंग की स्थापना कराई थी. पुजारी के अनुसार, यह शिवलिंग मंदिर निर्माण के दौरान खुदाई में 8-10 फीट नीचे स्वतः प्रकट हुआ था. इस शिवलिंग की पूजा मनोकामना पूर्ण करने वाली मानी जाती है.

श्राप ने जन्म दिया 13 मुखी शिवलिंग

स्थानीय बुजुर्ग उपाध्याय जी बताते हैं कि बाल्मीकि रामायण से लेकर तुलसीदास रामायण और कई लोककथाओं में इसका जिक्र मिलता है. पहले दशरथ की कोई संतान नहीं थी. शिवलिंग की स्थापना व पूजा-अर्चना के बाद ही उन्हें चारों पुत्र—राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न प्राप्त हुए. मंदिर परिसर में शिवलिंग के अलावा भैरव बाबा (काल भैरव), राधा-कृष्ण, राम-लक्ष्मण-जानकी, माता दुर्गा, भगवान हनुमान, संत रविदास और भगवान ब्रह्मा की चार मुखी प्रतिमा भी स्थापित है। सावन और महाशिवरात्रि पर यहां कांवड़ियों और भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. जो गंगा से जल लाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं.

लोकमान्यता और आज की आस्था

महाहर धाम केवल पौराणिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि लोक आस्था और ग्रामीण संस्कृति का प्रमुख केंद्र भी है. यहां हर सोमवार को और विशेषकर सावन माह में पूरा परिसर बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठता है. सावन के प्रत्येक सोमवार को स्वयं भगवान शिव रात्रि विश्राम के लिए आते हैं. इसे मनोकामना सिद्ध पीठ मानते हैं.आज भी दूर-दराज से श्रद्धालु यहां पुत्र कामना, पारिवारिक सुख और हर तरह की मनोकामना पूरी करने के लिए आते हैं. इतिहास और धर्मग्रंथों के अलावा, महाहर धाम का विवरण लोक साहित्य, स्थानीय कथाओं और अखबारों में भी मिलता है. कई किताबों में इसे त्रेता युगस्थ तीर्थ के रूप में उल्लेखित किया गया है, जहाँ दशरथ द्वारा स्थापित तेरह मुखी शिवलिंग आज भी भक्तों की आस्था का केंद्र है.

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