Sawan : सोमेश्वर महादेव मंदिर : चंद्रदेव ने की थी शिव की आराधना

Bindash Bol

Sawan : प्रयागराज में भगवान शिव का एक ऐसा अनूठा मंदिर है, जहां लोगों को गंभीर बीमारियों से निजात मिलती हैं। प्रयागराज में अरैल के किनारे सोमेश्वर महादेव के नाम से स्थित इस अनूठे मंदिर की स्थापना खुद चंद्रदेव ने तब की थी, जब उन्हें श्राप की वजह से कुष्ठरोग हो गया था।

काशी को भगवान भोलेनाथ की नगरी कहा जाता है, लेकिन संगम नगरी प्रयागराज से भी जटाधारी शिव का गहरा नाता है। सृष्टि की रचना के समय खुद ब्रह्मा ने प्रयागराज के दारागंज इलाके में दशश्वमेध स्वरुप में शिव को स्थापित किया था तो त्रेता युग में भगवान राम को सवा करोड़ शिवलिंग स्थापित करने के बाद ही ब्रह्म हत्या से मुक्ति मिली थी। प्रयागराज में भगवान शिव की कचहरी है तो द्वापर युग में पांडवों द्वारा स्थापित पडिला महादेव मंदिर भी। गंगा -यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी तट पर अरैल इलाके में स्थित सोमेश्वर महादेव मंदिर की अलग और अनूठी कथा है।

  • चंद्रदेव को मिला था श्राप

पदम पुराण की कथा के मुताबिक़ राजा दक्ष ने अपनी 27 पुत्रियों का विवाह चंद्रदेव से किया था। चंद्रदेव सोलह कलाओं में माहिर होने की वजह से बेहद खूबसूरत थे। 27 पत्नियां होने के बावजूद चंद्रदेव सिर्फ रोहिणी से ही सबसे ज़्यादा प्यार करते थे। बाकी 26 पत्नियों को उपेक्षित रखने की वजह से चंद्रदेव को श्राप की वजह से कुष्ठ रोग हो गया था। उनकी बीमारी कहीं ठीक नहीं हो रही थी। ऐसे में देवताओं की सलाह पर चन्द्रमा ने तीर्थराज प्रयागराज में आकर यहां संगम के किनारे अरैल इलाके में शिवलिंग स्थापित कर भगवान शिव की आराधना की। चन्द्रमा की तपस्या से भोलेनाथ इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने न सिर्फ साक्षात रूप में दर्शन दिए, बल्कि उनका कुष्ठरोग ठीक होने का आशीर्वाद भी दिया। चन्द्रमा का एक नाम सोम भी है, इस मंदिर को सोमेश्वर महादेव नाम दिया गया है। यहीं स्थापित शिवलिंग की वजह से उन्हें महीने में पंद्रह दिन पूरी चमक बिखेरने का भी वरदान मिला। प्रत्येक पूर्णिमा पर मंदिर के गुंबद में लगे त्रिशूल की दिशा खुद बदल जाती है। सावन में एक महीने के मेले का आयोजन होता है।

Share This Article
Leave a Comment