Shant Hawa : शान्त हवा

Bindash Bol

डॉ प्रशान्त करण  (आईपीएस) रांची

Shant Hawa : अपनी फटफटिया ठीक करने रवि बाबू हमीद के गैरेज में पँहुचे ही थे कि दूर से शशि जी आते दिखाई दिए।शशि बाबू विदेश में बस जो गए थे और उन्हें अचानक देख कर रवि बाबू आश्चर्य चकित हो गए।दुआ सलाम के बाद बात बढाने के लिए रवि बाबू ने कहा-आज शान्त हवा है।शशि बाबू ने गेराज के एक स्टूल पर बैठते हुए कहा-शान्त हवा का मतलब भी समझते हैं?मैं विदेश में अपनी जिम्मेदारी खत्म कर रिटायर्ड जीवन जी रहा था।कुछ दिनों में बोर हो गया।सोचा अब हिंदी पढ़ता हूँ, इससे विदेश में हिंदी पढ़ाकर नया जीवन शुरू करूँगा।तो सुनिए-शान्त का अर्थ है-मौन,चुप,निःशब्द, धीर,स्थिरमना,अचंचल,श्रान्त,थका, रुका हुआ,शमित,मिटा हुआ,संतुष्ट आदि।हवा का अर्थ है-,एक तत्व,जो भूमण्डल को चारों ओर से घेरे हुए है और कुछ गैसों विशेषकर ऑक्सिजन, नाइट्रोजन के मेल से बना है।इसका पर्यायवाची शब्द समीर,वायु,सांस,गोज,बहुत,प्रेतादि,अफवाह,आडम्बर,बहुत हल्की वस्तु आदि है।पर शान्त हवा का अर्थ है कि कोई भयंकर तूफान आने का संकेत हो रहा है।
रवि बाबू मुस्कुराए और पहले से चुपचाप बैठे रामलाल जी की ओर देखा।फिर बोले-हवा स्त्रीलिंग शब्द है।शशि जी,अगर स्त्रीलिंग शब्द के साथ शान्त लग जाये तो परिणाम तो भयंकर होंगे ही न!
पीछे से रामलाल जी बोलते उठकर जाने लगे-शान्त हवा है।
थोड़ी देर की औपचारिकता के बाद शशि जी पास के रामु के पान दुकान पर आकर सिगरेट की कश लगाने लगे और रवि बाबू पिपरमिंट के लेमनचूस चबाने में व्यस्त हो गए।रामु ने बात छेड़ी-देखा,रामलाल जी पिछले तीन दिनों से गुमसुम हैं।सिर्फ कहते हैं-शान्त हवा है।मेरा अनुभव कहता है कि वे जरूर कोई बड़ा गुल खिलाने वाले हैं।
रवि बाबू ने मज़ाक में कहा-इसके पहले करीब तीस बरस पहले ऐसे दो मौके आये थे,जब मुझे शान्त हवा लगी थी,बाकी तो जिंदगी भर आंधियों से लड़ते रहे।पहला मौका था जब मुहल्ले की एक सुंदर कन्या को प्रेम पत्र लिखा और उसके छोटे अबोध भाई को कन्या तक पंहुचाने को कहा था।शान्त हवा के कारण वह पत्र कन्या के पिता जी के हाथ लग गया और शाम होते होते आंधी-तूफान ने मेरा हाल बदतर कर दिया।दूसरी घटना नैनीताल तबादले की है जब अचानक स्वतंत्र गृहस्थ जीवन में वहाँ ताबदला हुआ।भैया,उसके बाद तो अपनी ज़िंदगी बदल गयी।आज भी बिना भगौने और सारे बर्तन साफ किए मैं सोता नहीं हूँ।इसलिए शान्त हवा से नहीं घबराता।
  शाम होते-होते रामलाल जी के शान्त हवा की पोल खुल ही गयी।मुहल्ले में साहू जी का परिवार डंडे लेकर रामलाल जी को खोज रहा था।रामु ने बताया कि रामलाल जी शिव प्रसाद की कन्या कामिनी को लेकर फरार हैं।शान्त हवा के बाद रामलाल जी की करतूत ने मुहल्ले में तूफान खड़ा कर दिया था।दूसरे दिन सुबह रामलाल जी कामिनी के साथ रिक्शे पर बैठे साहू जी के घर गए।रामलाल जी और कामिनी ने नए वस्त्र पहन रखे थे,दोनों के गले में गुलाब की मालाएं थीं,कामिनी सिर से आँचल हटाकर बड़ी सावधानी से माँग के सिंदूर दिखा रही थी।
    साहू जी ने मुँह फेर लिया।रामलाल जी की योजना पर पानी फिर गया।कामिनी करोड़पति साहू जी की इकलौती संतान थी।रामलाल जी ने धैर्य से काम लिया।वे चुप रहे।कामिनी अपने पिता के घर लौट गई।अब रामलाल जी का सारा खर्च कामिनी देती है।रामलाल जी फिर से चुप हो गए हैं।रामु फिर से कहने लगा है-शान्त हवा है,भाइयों।रामलाल जी पर नज़र रखियो।

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