Shivalinga : सृष्टि का जीवंत प्रतीक

Bindash Bol

Shivalinga : शिव पुराण के मुताबिक, एक बार ब्रह्मा और विष्णु में श्रेष्ठता का विवाद छिड़ गया। दोनों यह सिद्ध करना चाहते थे कि उनमें से कौन सर्वोच्च है। तभी एक अनंत ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ, जिसके आदि और अंत का पता लगाना असंभव था। ब्रह्मा ऊपर की ओर गए, विष्णु नीचे की ओर, पर दोनों ही इसके सिरे नहीं ढूंढ पाए। अंत में, परमशिव ने प्रकट होकर कहा, “मैं ही सृष्टि का स्रोत और लय हूं। यह लिंग मेरा प्रतीक है, जो चेतना और शक्ति का योग दर्शाता है।” लिंग पुराण कहता है कि यह मोक्ष का द्वार है। रामायण के मुताबिक, भगवान राम ने रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना करके पूजा की थी। उपनिषद और तंत्र शास्त्र शिवलिंग को आत्म-जागृति और सृष्टि के रहस्यों को समझने का साधन मानते हैं। इस तरह, शिवलिंग केवल पत्थर नहीं, बल्कि सृष्टि का जीवंत प्रतीक है।

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